भगवान श्री गणेश (श्री गणेश कवच) कवच मंत्र
स्कन्धौ पातु गजस्कन्धः स्तनौ विघ्नविनाशनः । हृदयं गणनाथस्तु हेरम्बो जठरं महान् ॥ धराधरः पातु पार्श्वौ पृष्ठं विघ्नहरः शुभः । लिङ्गं गुह्यं सदा पातु वक्रतुण्डो महाबलः ॥ गणक्रीडो जानुजङ्घे ऊरू मङ्गलमूर्तिमान् । एकदन्तो महाबुद्धिः पादौ गुल्फौ सदाऽवतु ॥ क्षिप्रप्रसादनो बाहू पाणी आशाप्रपूरकः । अङ्गुलीश्च नखान्पातु पद्महस्तोऽरिनाशनः ॥ सर्वाङ्गानि मयूरेशो विश्वव्यापी सदाऽवतु । अनुक्तमपि यत्स्थानं धूम्रकेतुः सदाऽवतु ॥ आमोदस्त्वग्रतः पातु प्रमोदः पृष्ठतोऽवतु । प्राच्यां रक्षतु बुद्धीश आग्नेय्यां सिद्धिदायकः ॥ दक्षिणस्यामुमापुत्रो नैऋत्यां तु गणेश्वरः । प्रतीच्यां विघ्नहर्ताऽव्याद्वायव्यां गजकर्णकः ॥ कौबेर्यां निधिपः पायादीशान्यामीशनन्दनः । दिवाऽव्यादेकदन्तस्तु रात्रौ सन्ध्यासु विघ्नहृत् ॥ 14
यक्ष, राक्षस, पिशाच, असुर और कुग्रहों से रक्षा, भौतिक सुख-समृद्धि, राज-सभा में विजय, कारागृह से मुक्ति, यात्रा एवं युद्ध में निर्विघ्न सफलता, तथा सम्पूर्ण परिवार की सुरक्षा और सर्वसिद्धि 14।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
यक्ष, राक्षस, पिशाच, असुर और कुग्रहों से रक्षा, भौतिक सुख-समृद्धि, राज-सभा में विजय, कारागृह से मुक्ति, यात्रा एवं युद्ध में निर्विघ्न सफलता, तथा सम्पूर्ण परिवार की सुरक्षा और सर्वसिद्धि 14।
इस मंत्र से क्या होगा?
यक्ष, राक्षस, पिशाच, असुर और कुग्रहों से रक्षा, भौतिक सुख-समृद्धि, राज-सभा में विजय, कारागृह से मुक्ति, यात्रा एवं युद्ध में निर्विघ्न सफलता, तथा सम्पूर्ण परिवार की सुरक्षा और सर्वसिद्धि
जाप विधि
इस कवच का पाठ तीनों संध्याओं (त्रिसन्ध्य) में नियमित रूप से करें। इसे भूर्जपत्र पर लिखकर कण्ठ में धारण करें। आकर्षण, स्तम्भन अथवा बंदी मुक्ति जैसी विशेष सिद्धियों के लिए 21 दिनों तक प्रतिदिन 7 या 21 बार पाठ करें 14।
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beej mantraक्रीं
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naam mantraसाम्ब सदाशिव
jap mantraॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्