ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भगवान श्री गणेश (श्री गणेश कवच)

भगवान श्री गणेश (श्री गणेश कवच) कवच मंत्र

स्कन्धौ पातु गजस्कन्धः स्तनौ विघ्नविनाशनः । हृदयं गणनाथस्तु हेरम्बो जठरं महान् ॥ धराधरः पातु पार्श्वौ पृष्ठं विघ्नहरः शुभः । लिङ्गं गुह्यं सदा पातु वक्रतुण्डो महाबलः ॥ गणक्रीडो जानुजङ्घे ऊरू मङ्गलमूर्तिमान् । एकदन्तो महाबुद्धिः पादौ गुल्फौ सदाऽवतु ॥ क्षिप्रप्रसादनो बाहू पाणी आशाप्रपूरकः । अङ्गुलीश्च नखान्पातु पद्महस्तोऽरिनाशनः ॥ सर्वाङ्गानि मयूरेशो विश्वव्यापी सदाऽवतु । अनुक्तमपि यत्स्थानं धूम्रकेतुः सदाऽवतु ॥ आमोदस्त्वग्रतः पातु प्रमोदः पृष्ठतोऽवतु । प्राच्यां रक्षतु बुद्धीश आग्नेय्यां सिद्धिदायकः ॥ दक्षिणस्यामुमापुत्रो नैऋत्यां तु गणेश्वरः । प्रतीच्यां विघ्नहर्ताऽव्याद्वायव्यां गजकर्णकः ॥ कौबेर्यां निधिपः पायादीशान्यामीशनन्दनः । दिवाऽव्यादेकदन्तस्तु रात्रौ सन्ध्यासु विघ्नहृत् ॥ 14

यक्ष, राक्षस, पिशाच, असुर और कुग्रहों से रक्षा, भौतिक सुख-समृद्धि, राज-सभा में विजय, कारागृह से मुक्ति, यात्रा एवं युद्ध में निर्विघ्न सफलता, तथा सम्पूर्ण परिवार की सुरक्षा और सर्वसिद्धि 14।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारकवच मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

यक्ष, राक्षस, पिशाच, असुर और कुग्रहों से रक्षा, भौतिक सुख-समृद्धि, राज-सभा में विजय, कारागृह से मुक्ति, यात्रा एवं युद्ध में निर्विघ्न सफलता, तथा सम्पूर्ण परिवार की सुरक्षा और सर्वसिद्धि 14।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

यक्ष, राक्षस, पिशाच, असुर और कुग्रहों से रक्षा, भौतिक सुख-समृद्धि, राज-सभा में विजय, कारागृह से मुक्ति, यात्रा एवं युद्ध में निर्विघ्न सफलता, तथा सम्पूर्ण परिवार की सुरक्षा और सर्वसिद्धि

जाप विधि

इस कवच का पाठ तीनों संध्याओं (त्रिसन्ध्य) में नियमित रूप से करें। इसे भूर्जपत्र पर लिखकर कण्ठ में धारण करें। आकर्षण, स्तम्भन अथवा बंदी मुक्ति जैसी विशेष सिद्धियों के लिए 21 दिनों तक प्रतिदिन 7 या 21 बार पाठ करें 14।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

vaidik mantra

ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिर्व्यशेमहि देवहितं यदायुः ॥

jap mantra

ॐ उलटत नरसिंह पलटत काया एहिले नरसिंह तोहे बुलाया जो मोर नाम करत सो मरत परत भैरव चक्कर में उल्टी वेद उसी को लागे कार दुहाई बड़े वीर नरसिंह की दुहाई कामरो कामाख्या देवी की दुहाई अष्टभुज देवी कालिका की दुहाई शिव सतगुरु के बंदे पायो

gyan mantra

ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

stotra mantra

को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 40

mool mantra

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः (सामान्य मूल: ॐ गुरवे नमः)

tantrik mantra

ॐ ह्रीं ऐं मातंग्यै नमः