वरुण / क्षमा प्रार्थना मंत्र (५.८५.८) वैदिक मंत्र
ॐ कितावासो यद्रिरिपुर्न दीवि यद्वाघा सत्यमुत यन्न विद्म । सर्वा ता विष्य शिथिरेव देवाथा ते स्याम वरुण प्रियासः ॥
सचेतन एवं अचेतन अवस्था में किए गए पापों से मुक्ति, आत्मग्लानि का शमन एवं ईश्वरीय कृपा।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सचेतन एवं अचेतन अवस्था में किए गए पापों से मुक्ति, आत्मग्लानि का शमन एवं ईश्वरीय कृपा।
इस मंत्र से क्या होगा?
सचेतन एवं अचेतन अवस्था में किए गए पापों से मुक्ति, आत्मग्लानि का शमन एवं ईश्वरीय कृपा
जाप विधि
सायं कालीन संध्या वंदन के देव-तर्पण भाग में अथवा रात्रि शयन से पूर्व ३ बार मानसिक जप।
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