वरुण / क्षमा प्रार्थना मंत्र (५.८५.८) वैदिक मंत्र
ॐ कितावासो यद्रिरिपुर्न दीवि यद्वाघा सत्यमुत यन्न विद्म । सर्वा ता विष्य शिथिरेव देवाथा ते स्याम वरुण प्रियासः ॥
सचेतन एवं अचेतन अवस्था में किए गए पापों से मुक्ति, आत्मग्लानि का शमन एवं ईश्वरीय कृपा।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
सचेतन एवं अचेतन अवस्था में किए गए पापों से मुक्ति, आत्मग्लानि का शमन एवं ईश्वरीय कृपा।
इस मंत्र से क्या होगा?
सचेतन एवं अचेतन अवस्था में किए गए पापों से मुक्ति, आत्मग्लानि का शमन एवं ईश्वरीय कृपा
जाप विधि
सायं कालीन संध्या वंदन के देव-तर्पण भाग में अथवा रात्रि शयन से पूर्व ३ बार मानसिक जप।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः । सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
jap mantraॐ ऐं महासरस्वत्यै नमः
gyan mantraयां मेधां देवगणाः पितरश्चोपासते । तया मामद्य मेधयाऽग्ने मेधाविनं कुरु स्वाहा ॥
stotra mantraयोगो योगविदां नेता प्रधानपुरुषेश्वरः। नारसिंहवपुः श्रीमान् केशवः पुरुषोत्तमः ॥ 12
mool mantraॐ ह्रां ह्रीं हुं समस्त ग्रह दोष विनाशाय ॐ
tantrik mantraॐ ह्रीं ऐं क्लीं श्री बगलाने मम रिपून नाशय नाशय ममैश्वर्याणि देहि देहि शीघ्रं मनोवांछितं साधय साधय ह्रीं स्वाहा