ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
पुरुष / पुरुष सूक्त (१०.९०.१)

पुरुष / पुरुष सूक्त (१०.९०.१) वैदिक मंत्र

ॐ सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात् । स भूमिं विश्वतो वृत्वात्यतिष्ठद्दशांगुलम् ॥

विराट् ब्रह्म की उपासना, सृष्टि के मूल तत्त्व का बोध, आध्यात्मिक पूर्णता एवं अहंकार का समूल नाश।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारवैदिक मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

विराट् ब्रह्म की उपासना, सृष्टि के मूल तत्त्व का बोध, आध्यात्मिक पूर्णता एवं अहंकार का समूल नाश।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

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विराट् ब्रह्म की उपासना, सृष्टि के मूल तत्त्व का बोध, आध्यात्मिक पूर्णता एवं अहंकार का समूल नाश

जाप विधि

षोडशोपचार पूजा, महायज्ञों अथवा विष्णु आराधना में पवित्र आसन पर बैठकर सस्वर एवं स्पष्ट पाठ।

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