माँ वाग्वादिनी सरस्वती ज्ञान मंत्र
वद वद वाग्वादिनी स्वाहा ॥
वाक्-सिद्धि, स्पष्ट उच्चारण, शास्त्रार्थ में विजय और तीव्र ज्ञानार्जन 4।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
वाक्-सिद्धि, स्पष्ट उच्चारण, शास्त्रार्थ में विजय और तीव्र ज्ञानार्जन 4।
इस मंत्र से क्या होगा?
वाक्-सिद्धि, स्पष्ट उच्चारण, शास्त्रार्थ में विजय और तीव्र ज्ञानार्जन
जाप विधि
विद्यार्जन, वाक्-क्षमता और कुशाग्रता हेतु नित्य जप 4।
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ॐ भूर्भुव: स्व: प्रांचामा पातु भूतेशः अग्ने पातु शंकर दक्षिणे पातुमा रुद्रो नैऋत्य स्थानु रेवच पश्चिमे खंड परशु वायव्या चंद्रशेखर उत्तरे गिरीशः पातु चैशान्य ईश्वर स्वयं उर्ध्वे मुंड सदा पातु चाध्य मृत्युंजय स्वयं जले स्थले चांदरीक्षे स्वप्ने जागरने सदा पिना कितुमा प्रीत्या भक्तम वैभक्त वत्सल य: सदा धारयेन्मर्त्य: शैवं कवचमुत्तमम् । न तस्य जायते क्वापि भयं शंभोरनुग्रहात् ॥ 30॥ इति अमोघ शिव कवच सम्पूर्ण ॥ 4
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