माँ वाग्वादिनी सरस्वती ज्ञान मंत्र
वद वद वाग्वादिनी स्वाहा ॥
वाक्-सिद्धि, स्पष्ट उच्चारण, शास्त्रार्थ में विजय और तीव्र ज्ञानार्जन 4।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
वाक्-सिद्धि, स्पष्ट उच्चारण, शास्त्रार्थ में विजय और तीव्र ज्ञानार्जन 4।
इस मंत्र से क्या होगा?
वाक्-सिद्धि, स्पष्ट उच्चारण, शास्त्रार्थ में विजय और तीव्र ज्ञानार्जन
जाप विधि
विद्यार्जन, वाक्-क्षमता और कुशाग्रता हेतु नित्य जप 4।
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ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय पराय परमपुरुषाय परमात्मने परकर्ममन्त्रयन्त्रौषधास्त्रशस्त्राणि संहर संहर मृत्योर्मोचय मोचय ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय दीप्त्रे ज्वालापरीताय सर्वदिक्षोभणकराय हुँ फट् ब्रह्मणे परंज्योतिषे स्वाहा
kavach mantraश्रीम क्लीम सरस्वती बुद्ध जन्य स्वाहा सततम मंत्र राजोयम दक्षिणे मां सदावतु ऐम ह्रीम श्रीम क्लीम त्र्यक्षरो मंत्रो नैऋत्यम सर्वदावतु ओम ऐकवासिन्य स्वाहा मां वारुणेवतु ओम सर्वांबिकाय स्वाहा वायव्यमा सदावतु ओम ऐम श्रीम क्लीम गद्यवासिन्य स्वाहा माम उत्तरेवतु ऐम सर्वशास्त्र वासिन्ये स्वाहान्य सदा ओम ह्रीम सर्व पूजिता स्वाहा चोरध्वं सदावतु ओम ह्रीम पुस्तक वासिन्य स्वाहा धोमांम सदावतु ओम ग्रंथ बीज स्वरूपाय स्वाहा मां सर्वतो वतु इति कथित विप्र ब्राह्म मंत्र विग्रहम इदम विश्व जयं नाम कवचम ब्रह्म रूपकम पंचलक्ष जपे नैव सिद्धमु कवचम भवे यदि सिद्ध कवचो बृहस्पति समो भवे महा वाग्मी कविंद्र त्रैलोक्य विजयी भवेत 27
beej mantraश्रीं
ugra mantraॐ ह्रीं ह्रीं हूं हूं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
dhyan mantraॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
stotra mantraपूतात्मा परमात्मा च मुक्तानां परमा गतिः । अव्ययः पुरुषः साक्षी क्षेत्रज्ञोऽक्षर एव च ॥ 12