माँ सरस्वती (वेदोक्त स्वरूप) ज्ञान मंत्र
महो अर्णः सरस्वती प्रचेयति केतुना । धियो विश्वा विराजति ॥
ज्ञान पिपासुओं के मस्तिष्क और चेतना का दिव्य जागरण एवं प्रकाश 4।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
ज्ञान पिपासुओं के मस्तिष्क और चेतना का दिव्य जागरण एवं प्रकाश 4।
इस मंत्र से क्या होगा?
ज्ञान पिपासुओं के मस्तिष्क और चेतना का दिव्य जागरण एवं प्रकाश
जाप विधि
ऋग्वेद के इस मंत्र का नित्य ब्रह्ममुहूर्त में पाठ 4।
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ओम चौकी हनुमत वीर की बाण ध्वजा फहराए मारू मारू मारुत सुत मुष्टिक शत्रु नसाय मेरे इष्ट रामचंद्र जी अगुवा हनुमंता वीर चौकी सुदर्शन चक्र की रक्षा करें शरीर टोना ब्रह्म भूत प्रेत संग डाईन डाकिनी सांप बिच्छू चोर बट सब कुछ निष्फल जाई 6
tantrik mantraॐ सर्व बुद्धि प्रदे वर्णनीय सर्व सिद्धि प्रदे डाकिनीय ॐ वज्र वैरोचनीयै नमः
mool mantraॐ वराहाय नमः
stotra mantraसर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयंकरि । सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ 29
jap mantraॐ श्री दुर्गायै नमः
vaidik mantraॐ पुनन्तु मा देवजनाः पुनन्तु मनसा धियः । पुनन्तु विश्वा भूतानि जातवेदः पुनीहि मा ॥