माँ सरस्वती (वेदोक्त स्वरूप) ज्ञान मंत्र
महो अर्णः सरस्वती प्रचेयति केतुना । धियो विश्वा विराजति ॥
ज्ञान पिपासुओं के मस्तिष्क और चेतना का दिव्य जागरण एवं प्रकाश 4।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
ज्ञान पिपासुओं के मस्तिष्क और चेतना का दिव्य जागरण एवं प्रकाश 4।
इस मंत्र से क्या होगा?
ज्ञान पिपासुओं के मस्तिष्क और चेतना का दिव्य जागरण एवं प्रकाश
जाप विधि
ऋग्वेद के इस मंत्र का नित्य ब्रह्ममुहूर्त में पाठ 4।
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न मां त्यजेथाः श्रितकल्पवल्लि सद्भक्ति-चिन्तामणि-कामधेनो । न मां त्यजेथा भव सुप्रसन्ने गृहे कलत्रेषु च पुत्रवर्गे ॥ 27
siddh mantraॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः
sabar mantraभैरव शिव का चेला जहां जहां-जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड काचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा ओम गुरु जी गोरख जति मच्छिंद्र का चेला शिव के रूप में दिखे अलबेला कानों कुंडल गले में नादी हाथ त्रिशूल नाथ है आदि अलख पुरुष को करूं आदेश जन्म जन्म के काटो कलेश भगवा वेश हाथ में खप्पर भैरव शिव का चेला जहां जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड कांचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा 2
bhakti mantraराम राम रामेति रमे रामे मनोरमे
kaamya mantraसर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥
mool mantraॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः