माँ सरस्वती (वेदोक्त स्वरूप) ज्ञान मंत्र
महो अर्णः सरस्वती प्रचेयति केतुना । धियो विश्वा विराजति ॥
ज्ञान पिपासुओं के मस्तिष्क और चेतना का दिव्य जागरण एवं प्रकाश 4।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
ज्ञान पिपासुओं के मस्तिष्क और चेतना का दिव्य जागरण एवं प्रकाश 4।
इस मंत्र से क्या होगा?
ज्ञान पिपासुओं के मस्तिष्क और चेतना का दिव्य जागरण एवं प्रकाश
जाप विधि
ऋग्वेद के इस मंत्र का नित्य ब्रह्ममुहूर्त में पाठ 4।
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भ्रीं
siddh mantraॐ धूं धूं धूमावती स्वाहा
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dhyan mantraबर्हापीडं नटवरवपुः कर्णयोः कर्णिकारं बिभ्रद्वासः कनककपिशं वैजयन्तीं च मालाम्। रन्ध्रान् वेणोरधरसुधया पूरयन् गोपवृन्दैर्वृन्दारण्यं स्वपदरमणं प्राविशद् गीतकीर्तिः॥
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