माँ सरस्वती (वेदोक्त स्वरूप) ज्ञान मंत्र
महो अर्णः सरस्वती प्रचेयति केतुना । धियो विश्वा विराजति ॥
ज्ञान पिपासुओं के मस्तिष्क और चेतना का दिव्य जागरण एवं प्रकाश 4।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
ज्ञान पिपासुओं के मस्तिष्क और चेतना का दिव्य जागरण एवं प्रकाश 4।
इस मंत्र से क्या होगा?
ज्ञान पिपासुओं के मस्तिष्क और चेतना का दिव्य जागरण एवं प्रकाश
जाप विधि
ऋग्वेद के इस मंत्र का नित्य ब्रह्ममुहूर्त में पाठ 4।
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ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा ॥
naam mantraदुर्गा
stotra mantraदेवोsपराह्णे मधुहोग्रधन्वा सायं त्रिधामावतु माधवो माम्। दोषे हृषीकेश उतार्धरात्रे निशीथ एकोsवतु पद्मनाभः।। 7
sabar mantraॐ पीर बजरंगी राम लक्ष्मण के संगी, जहां जहां जाए, फतह के डंके बजाये, दुहाई माता अञ्जनि की आन 9
tantrik mantraॐ ह्रीं ऐं क्लीं श्री बगलाने मम रिपून नाशय नाशय ममैश्वर्याणि देहि देहि शीघ्रं मनोवांछितं साधय साधय ह्रीं स्वाहा
kaamya mantraप्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि। त्रैलोक्यवासिनामीड्ये लोकानां वरदा भव॥