ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भगवान कार्तिकेय (प्रज्ञा विवर्धन स्वरूप)

भगवान कार्तिकेय (प्रज्ञा विवर्धन स्वरूप) ज्ञान मंत्र

योगीश्वरो महासेनः कार्तिकेयोऽग्निनन्दनः । स्कंदः कुमारः सेनानी स्वामी शंकरसंभवः ॥ गांगेयस्ताम्रचूडश्च ब्रह्मचारी शिखिध्वजः । तारकारिरुमापुत्रः क्रोधारिश्च षडाननः ॥ शब्दब्रह्मसमुद्रश्च सिद्धः सारस्वतो गुहः । सनत्कुमारो भगवान् भोगमोक्षफलप्रदः ॥ शरजन्मा गणाधीशः पूर्वजो मुक्तिमार्गकृत् । सर्वागमप्रणेता च वांछितार्थप्रदर्शनः ॥ अष्टाविंशतिनामानि मदीयानीति यः पठेत् । प्रत्यूषं श्रद्धया युक्तो मूको वाचस्पतिर्भवेत् ॥ महामंत्रमयानीति मम नामानुकीर्तनात् । महाप्रज्ञामवाप्नोति नात्र कार्या विचारणा ॥

महाप्रज्ञा (सर्वोच्च ज्ञान) की प्राप्ति, वाक्-सिद्धि, और मूढ़ता या मंदबुद्धि दोष का निवारण 5।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारज्ञान मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

महाप्रज्ञा (सर्वोच्च ज्ञान) की प्राप्ति, वाक्-सिद्धि, और मूढ़ता या मंदबुद्धि दोष का निवारण 5।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

महाप्रज्ञा (सर्वोच्च ज्ञान) की प्राप्ति, वाक्-सिद्धि, और मूढ़ता या मंदबुद्धि दोष का निवारण

जाप विधि

नित्य ब्रह्ममुहूर्त (प्रत्यूष काल) में पवित्रता के साथ श्रद्धापूर्वक पाठ। पारद कार्तिकेय मूर्ति के सम्मुख जप विशेष फलदायी है 5।

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