भगवान कार्तिकेय (प्रज्ञा विवर्धन स्वरूप) ज्ञान मंत्र
योगीश्वरो महासेनः कार्तिकेयोऽग्निनन्दनः । स्कंदः कुमारः सेनानी स्वामी शंकरसंभवः ॥ गांगेयस्ताम्रचूडश्च ब्रह्मचारी शिखिध्वजः । तारकारिरुमापुत्रः क्रोधारिश्च षडाननः ॥ शब्दब्रह्मसमुद्रश्च सिद्धः सारस्वतो गुहः । सनत्कुमारो भगवान् भोगमोक्षफलप्रदः ॥ शरजन्मा गणाधीशः पूर्वजो मुक्तिमार्गकृत् । सर्वागमप्रणेता च वांछितार्थप्रदर्शनः ॥ अष्टाविंशतिनामानि मदीयानीति यः पठेत् । प्रत्यूषं श्रद्धया युक्तो मूको वाचस्पतिर्भवेत् ॥ महामंत्रमयानीति मम नामानुकीर्तनात् । महाप्रज्ञामवाप्नोति नात्र कार्या विचारणा ॥
महाप्रज्ञा (सर्वोच्च ज्ञान) की प्राप्ति, वाक्-सिद्धि, और मूढ़ता या मंदबुद्धि दोष का निवारण 5।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
महाप्रज्ञा (सर्वोच्च ज्ञान) की प्राप्ति, वाक्-सिद्धि, और मूढ़ता या मंदबुद्धि दोष का निवारण 5।
इस मंत्र से क्या होगा?
महाप्रज्ञा (सर्वोच्च ज्ञान) की प्राप्ति, वाक्-सिद्धि, और मूढ़ता या मंदबुद्धि दोष का निवारण
जाप विधि
नित्य ब्रह्ममुहूर्त (प्रत्यूष काल) में पवित्रता के साथ श्रद्धापूर्वक पाठ। पारद कार्तिकेय मूर्ति के सम्मुख जप विशेष फलदायी है 5।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः
ugra mantraॐ स्त्रीं आं अक्षोभ्य स्वाहा
stotra mantraसर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥ 24
vaidik mantraॐ आप इद्वा उ भेषजीरापो अमीवचातनीः । आपः सर्वस्य भेषजीस्तास्ते कृण्वन्तु भेषजम् ॥
shanti mantraॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्माऽमृतं गमय ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
naam mantraषण्मुख