ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
मन / शिवसंकल्प सूक्त (३४.१)

मन / शिवसंकल्प सूक्त (३४.१) वैदिक मंत्र

ॐ यज्जाग्रतो दूरमुदैति दैवं तदु सुप्तस्य तथैवैति । दूरंगमं ज्योतिषां ज्योतिरेकं तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।

मन की चंचलता का शमन, एकाग्रता की प्राप्ति, आत्म-निरीक्षण एवं मन को शुभ संकल्पों से युक्त करना।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारवैदिक मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

मन की चंचलता का शमन, एकाग्रता की प्राप्ति, आत्म-निरीक्षण एवं मन को शुभ संकल्पों से युक्त करना।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

मन की चंचलता का शमन, एकाग्रता की प्राप्ति, आत्म-निरीक्षण एवं मन को शुभ संकल्पों से युक्त करना

जाप विधि

ध्यान से पूर्व, प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में सुखासन पर बैठकर नेत्र बंद करके ३ से ५ बार उपांशु उच्चारण।

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