मन / शिवसंकल्प सूक्त (३४.१) वैदिक मंत्र
ॐ यज्जाग्रतो दूरमुदैति दैवं तदु सुप्तस्य तथैवैति । दूरंगमं ज्योतिषां ज्योतिरेकं तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।
मन की चंचलता का शमन, एकाग्रता की प्राप्ति, आत्म-निरीक्षण एवं मन को शुभ संकल्पों से युक्त करना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
मन की चंचलता का शमन, एकाग्रता की प्राप्ति, आत्म-निरीक्षण एवं मन को शुभ संकल्पों से युक्त करना।
इस मंत्र से क्या होगा?
मन की चंचलता का शमन, एकाग्रता की प्राप्ति, आत्म-निरीक्षण एवं मन को शुभ संकल्पों से युक्त करना
जाप विधि
ध्यान से पूर्व, प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में सुखासन पर बैठकर नेत्र बंद करके ३ से ५ बार उपांशु उच्चारण।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ दाम् दत्तात्रेयाय स्वाहा
gyan mantraयोगीश्वरो महासेनः कार्तिकेयोऽग्निनन्दनः । स्कंदः कुमारः सेनानी स्वामी शंकरसंभवः ॥ गांगेयस्ताम्रचूडश्च ब्रह्मचारी शिखिध्वजः । तारकारिरुमापुत्रः क्रोधारिश्च षडाननः ॥ शब्दब्रह्मसमुद्रश्च सिद्धः सारस्वतो गुहः । सनत्कुमारो भगवान् भोगमोक्षफलप्रदः ॥ शरजन्मा गणाधीशः पूर्वजो मुक्तिमार्गकृत् । सर्वागमप्रणेता च वांछितार्थप्रदर्शनः ॥ अष्टाविंशतिनामानि मदीयानीति यः पठेत् । प्रत्यूषं श्रद्धया युक्तो मूको वाचस्पतिर्भवेत् ॥ महामंत्रमयानीति मम नामानुकीर्तनात् । महाप्रज्ञामवाप्नोति नात्र कार्या विचारणा ॥
mool mantraॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः (सामान्य मूल: ॐ केतवे नमः)
stotra mantraअग्राह्यः शाश्वतः कृष्णो लोहिताक्षः प्रतर्दनः । प्रभूतस्त्रिककुब्धाम पवित्रं मङ्गलं परम् ॥ 12
tantrik mantraक ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं स क ल ह्रीं
navgrah mantraॐ शिरोरूपाय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नो राहुः प्रचोदयात्।