भगवती चामुण्डा / नवदुर्गा (श्री चण्डी / देवी कवच) कवच मंत्र
ॐ यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्। यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥ अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम्। देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व महामुने॥ प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी। तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥ पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥ नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः। उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥ शाकिनी तथा अंतरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्च महाबलाय प्रभु तपिश न धीर वृषभ वृषभ लो कुष्मांडा ब्रॉदर यह नश्यंति दर्शनात्तस्य कवचे 9
अग्नि, रणभूमि और घोर विषम संकटों से तत्काल रक्षा, अमङ्गल, शोक, दुःख तथा भय का नाश, और मनुष्य के तेज एवं कीर्ति की भूतल पर वृद्धि 9।
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यह मंत्र क्यों?
अग्नि, रणभूमि और घोर विषम संकटों से तत्काल रक्षा, अमङ्गल, शोक, दुःख तथा भय का नाश, और मनुष्य के तेज एवं कीर्ति की भूतल पर वृद्धि 9।
इस मंत्र से क्या होगा?
अग्नि, रणभूमि और घोर विषम संकटों से तत्काल रक्षा, अमङ्गल, शोक, दुःख तथा भय का नाश, और मनुष्य के तेज एवं कीर्ति की भूतल पर वृद्धि
जाप विधि
श्रीचण्डीकवच का पाठ श्री दुर्गा सप्तशती के पाठांगभूत जप के रूप में किया जाता है। इसका पाठ अर्गला स्तोत्र और कीलकम् स्तोत्र से पूर्व श्रीजगदम्बा की प्रीति के लिये नित्य करना चाहिए। इसके ऋषि ब्रह्मा, छन्द अनुष्टुप् और देवता चामुण्डा हैं 9।
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क्रिम कामाख्या माई निज भैरव के संग आई देवे मनोवांछित सिद्धि पूरे सब कामना लेवे अडहुल का फूल सब स्त्री तोरा रूप मनसा पूरो माई तो शंकर की दुहाई क्रिंग क्रिंग क्रीम 18
tantrik mantraॐ बं बटुकाय नमः
ugra mantraॐ अक्षय श्री छिन्नमस्ता देवी जगत निवासनी अदृश्य सिद्धि शून्य गमन विजयै मम सिद्धि देहि देहि प्राण देहि देहि मम अमुक गौत्र अमुक शर्मा ह गुरूत्वाकर्षण शक्ति नाशय शून्य सिद्धि प्राप्तर्थं शक्ति स्याद विनियोग
siddh mantraॐ नमो भगवती वद वद वाग्देवी स्वाहा
naam mantraभद्रकाली
jap mantraॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा