माता सरस्वती (विश्वविजय सरस्वती कवच) कवच मंत्र
श्रीम क्लीम सरस्वती बुद्ध जन्य स्वाहा सततम मंत्र राजोयम दक्षिणे मां सदावतु ऐम ह्रीम श्रीम क्लीम त्र्यक्षरो मंत्रो नैऋत्यम सर्वदावतु ओम ऐकवासिन्य स्वाहा मां वारुणेवतु ओम सर्वांबिकाय स्वाहा वायव्यमा सदावतु ओम ऐम श्रीम क्लीम गद्यवासिन्य स्वाहा माम उत्तरेवतु ऐम सर्वशास्त्र वासिन्ये स्वाहान्य सदा ओम ह्रीम सर्व पूजिता स्वाहा चोरध्वं सदावतु ओम ह्रीम पुस्तक वासिन्य स्वाहा धोमांम सदावतु ओम ग्रंथ बीज स्वरूपाय स्वाहा मां सर्वतो वतु इति कथित विप्र ब्राह्म मंत्र विग्रहम इदम विश्व जयं नाम कवचम ब्रह्म रूपकम पंचलक्ष जपे नैव सिद्धमु कवचम भवे यदि सिद्ध कवचो बृहस्पति समो भवे महा वाग्मी कविंद्र त्रैलोक्य विजयी भवेत 27
असीमित ज्ञान, प्रखर बुद्धि और स्मरण शक्ति की प्राप्ति, अत्यंत प्रभावशाली वाणी (वाग्मी) का विकास, और त्रैलोक्य में सर्वत्र विजय तथा सम्मान की प्राप्ति 29।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
असीमित ज्ञान, प्रखर बुद्धि और स्मरण शक्ति की प्राप्ति, अत्यंत प्रभावशाली वाणी (वाग्मी) का विकास, और त्रैलोक्य में सर्वत्र विजय तथा सम्मान की प्राप्ति 29।
इस मंत्र से क्या होगा?
असीमित ज्ञान, प्रखर बुद्धि और स्मरण शक्ति की प्राप्ति, अत्यंत प्रभावशाली वाणी (वाग्मी) का विकास, और त्रैलोक्य में सर्वत्र विजय तथा सम्मान की प्राप्ति
जाप विधि
गुरु की विधिपूर्वक वंदना और अर्चना करने के पश्चात वस्त्र, अलंकार और चंदन धारण करें। तदुपरांत इस कवच का पाठ करें। पाँच लाख (पंचलक्ष) बार जप करने पर यह पूर्ण सिद्ध होता है, तत्पश्चात इसे धारण करें 29।
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हं, क्षं
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