ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
योग एवं ध्यान परंपरा

योग एवं ध्यान परंपरा शांति मंत्र

लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

इस शांति मंत्र का विशिष्ट प्रयोजन मन की असीम शांति का अनुभव करना, हृदय में बिना शर्त प्रेम (unconditional love) और करुणा का संचार करना, तथा व्यक्तिगत मानसिक चिंताओं और अवसाद से पूर्ण मुक्ति प्राप्त कर

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारशांति मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

इस शांति मंत्र का विशिष्ट प्रयोजन मन की असीम शांति का अनुभव करना, हृदय में बिना शर्त प्रेम (unconditional love) और करुणा का संचार करना, तथा व्यक्तिगत मानसिक चिंताओं और अवसाद से पूर्ण मुक्ति प्राप्त करना है 11। जब साधक 'समस्त लोकों' की शांति की कामना करता है, तो उसके स्वयं के अहंकार और व्यक्तिगत दुखों का दायरा सिकुड़ जाता है, जिससे मनोवैज्ञानिक तनाव (psychological stress) तुरंत शांत हो जाता है 3। यह ध्यान में स्थिरता लाता है, भटके हुए मन को वर्तमान क्षण में केंद्रित करता है, और आधिभौतिक (सांसारिक) व आध्यात्मिक (मानसिक) तापों को मिटाकर एक ऐसे शांत और विशुद्ध वातावरण का निर्माण करता है जहाँ केवल आनंद और संतुलन शेष रहता है 9।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

इस शांति मंत्र का विशिष्ट प्रयोजन मन की असीम शांति का अनुभव करना, हृदय में बिना शर्त प्रेम (unconditional love) और करुणा का संचार करना, तथा व्यक्तिगत मानसिक चिंताओं और अवसाद से पूर्ण मुक्ति प्राप्त करना है 11

02

जब साधक 'समस्त लोकों' की शांति की कामना करता है, तो उसके स्वयं के अहंकार और व्यक्तिगत दुखों का दायरा सिकुड़ जाता है, जिससे मनोवैज्ञानिक तनाव (psychological stress) तुरंत शांत हो जाता है 3

03

यह ध्यान में स्थिरता लाता है, भटके हुए मन को वर्तमान क्षण में केंद्रित करता है, और आधिभौतिक (सांसारिक) व आध्यात्मिक (मानसिक) तापों को मिटाकर एक ऐसे शांत और विशुद्ध वातावरण का निर्माण करता है जहाँ केवल आनंद और संतुलन शेष रहता है

जाप विधि

योग और ध्यान की आधुनिक एवं प्राचीन परंपराओं में यह अत्यंत संक्षिप्त किंतु गहन शांति मंत्र ध्यान की गहरी अवस्था में प्रवेश करने के लिए, या योगाभ्यास के विश्राम काल में जपा जाता है 15। साधक को किसी भी ध्यानात्मक आसन में बैठकर, नेत्र बंद कर, अपना ध्यान अनाहत चक्र (हृदय चक्र) पर केंद्रित करना चाहिए। इस मंत्र को श्वास के साथ मानसिक रूप से (अजपा जप) या बहुत ही मधुर और शांत स्वर में होंठों से जपा जा सकता है। मानसिक चिंताओं के शमन के लिए इसे माला पर १०८ बार एकाग्रता पूर्वक जपने से नाड़ी तंत्र में तत्काल शांति का अनुभव होता है 5।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

naam mantra

वरुण

siddh mantra

ॐ ह्रीं भैरवी कलौं ह्रीं स्वाहा ॥

vaidik mantra

ॐ एतावानस्य महिमातो ज्यायांश्च पूरुषः । पादोऽस्य विश्वा भूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि ॥

sabar mantra

रक्षपाल आठवा दंड क्षेत्रपाल भैरव हाथ भर खप्पर तेल सिंदूर रक्षपाल येता अष्ट भैरव सदा रहो कृपाल दंड हमारा पिंड का प्राण वज्र हो काया कर रक्षा काली का पूत आवे दंड जावे दंड सो काल भागे 12 कोस काला दंड शीर कंटक का फोड़ हमको रख दुष्ट को पक ऐता भैरव दंड मंत्र संपूर्ण भया श्री नाथ जी गुरु जी को आदेश आदेश सत्य नमो आदेश गुरु जी को आदेश ओम गुरु 10

gyan mantra

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना । या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥

kaamya mantra

प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि। त्रैलोक्यवासिनामीड्ये लोकानां वरदा भव॥