योग एवं ध्यान परंपरा शांति मंत्र
लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
इस शांति मंत्र का विशिष्ट प्रयोजन मन की असीम शांति का अनुभव करना, हृदय में बिना शर्त प्रेम (unconditional love) और करुणा का संचार करना, तथा व्यक्तिगत मानसिक चिंताओं और अवसाद से पूर्ण मुक्ति प्राप्त कर
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
इस शांति मंत्र का विशिष्ट प्रयोजन मन की असीम शांति का अनुभव करना, हृदय में बिना शर्त प्रेम (unconditional love) और करुणा का संचार करना, तथा व्यक्तिगत मानसिक चिंताओं और अवसाद से पूर्ण मुक्ति प्राप्त करना है 11। जब साधक 'समस्त लोकों' की शांति की कामना करता है, तो उसके स्वयं के अहंकार और व्यक्तिगत दुखों का दायरा सिकुड़ जाता है, जिससे मनोवैज्ञानिक तनाव (psychological stress) तुरंत शांत हो जाता है 3। यह ध्यान में स्थिरता लाता है, भटके हुए मन को वर्तमान क्षण में केंद्रित करता है, और आधिभौतिक (सांसारिक) व आध्यात्मिक (मानसिक) तापों को मिटाकर एक ऐसे शांत और विशुद्ध वातावरण का निर्माण करता है जहाँ केवल आनंद और संतुलन शेष रहता है 9।
इस मंत्र से क्या होगा?
इस शांति मंत्र का विशिष्ट प्रयोजन मन की असीम शांति का अनुभव करना, हृदय में बिना शर्त प्रेम (unconditional love) और करुणा का संचार करना, तथा व्यक्तिगत मानसिक चिंताओं और अवसाद से पूर्ण मुक्ति प्राप्त करना है 11
जब साधक 'समस्त लोकों' की शांति की कामना करता है, तो उसके स्वयं के अहंकार और व्यक्तिगत दुखों का दायरा सिकुड़ जाता है, जिससे मनोवैज्ञानिक तनाव (psychological stress) तुरंत शांत हो जाता है 3
यह ध्यान में स्थिरता लाता है, भटके हुए मन को वर्तमान क्षण में केंद्रित करता है, और आधिभौतिक (सांसारिक) व आध्यात्मिक (मानसिक) तापों को मिटाकर एक ऐसे शांत और विशुद्ध वातावरण का निर्माण करता है जहाँ केवल आनंद और संतुलन शेष रहता है
जाप विधि
योग और ध्यान की आधुनिक एवं प्राचीन परंपराओं में यह अत्यंत संक्षिप्त किंतु गहन शांति मंत्र ध्यान की गहरी अवस्था में प्रवेश करने के लिए, या योगाभ्यास के विश्राम काल में जपा जाता है 15। साधक को किसी भी ध्यानात्मक आसन में बैठकर, नेत्र बंद कर, अपना ध्यान अनाहत चक्र (हृदय चक्र) पर केंद्रित करना चाहिए। इस मंत्र को श्वास के साथ मानसिक रूप से (अजपा जप) या बहुत ही मधुर और शांत स्वर में होंठों से जपा जा सकता है। मानसिक चिंताओं के शमन के लिए इसे माला पर १०८ बार एकाग्रता पूर्वक जपने से नाड़ी तंत्र में तत्काल शांति का अनुभव होता है 5।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिहृद्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
bhakti mantraश्री राम जय राम जय जय राम
gyan mantraमेधां म इन्द्रो दधातु मेधां देवी सरस्वती । मेधां मे अश्विनावुभावाधत्तां पुष्करस्रजा । अप्सरासु च या मेधा गन्धर्वेषु च यन्मनः । दैवीं मेधा सरस्वती सा मां मेधा सुरभिर्जुषतां स्वाहा ॥
naam mantraनरसिंह
jap mantraॐ हसां हसीं हसूं हसैं हसौं हसः
tantrik mantraॐ नमो भगवते महानृसिंहाय सिंहाय सिंहमुखाय विकटाय वज्रनखाय मां रक्ष रक्ष ममशरीरं नखशिखापर्यन्तं रक्ष रक्ष कुरु कुरु मदीयं शरीरं वज्राङ्गम् कुरु कुरु परयन्त्र परमन्त्र परतन्त्राणां क्षिणु क्षिणु स्तम्भय स्तम्भय स्वाहा