महाकाली (शत्रुनाशक उग्र रूप) उग्र मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं महाकालिकायै सर्व शत्रु नाशाय नाशाय
तुरंत फल प्राप्ति, शत्रु का अत्यंत तीव्र मारण व समस्त भयंकर संकटों का नाश 39।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
तुरंत फल प्राप्ति, शत्रु का अत्यंत तीव्र मारण व समस्त भयंकर संकटों का नाश 39।
इस मंत्र से क्या होगा?
तुरंत फल प्राप्ति, शत्रु का अत्यंत तीव्र मारण व समस्त भयंकर संकटों का नाश
जाप विधि
अष्टमी के दिन साधक काले तिल, काली मिर्च और घी को समान अनुपात में मिलाकर इस मंत्र से 1000 आहुतियां दें (गुरु दीक्षा के पश्चात्) 38।
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ब्रौं
kavach mantraऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्। जानुनी सेतुकृत् पातु जङ्घे दशमुखान्तकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः। एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्। पातालभूतलव्योम- चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः। रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति। जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः। वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। 34
navgrah mantraॐ ह्रीं श्रीं ख्रीं ऐं ग्लौं ग्रहाधिपतये बृहस्पतये ब्रीं ठः ऐं ठः श्रीं ठः स्वाहा॥
jap mantraसोऽहम्
dhyan mantraविशोका वा ज्योतिष्मती
mool mantraॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा