महाकाली (शत्रुनाशक उग्र रूप) उग्र मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं महाकालिकायै सर्व शत्रु नाशाय नाशाय
तुरंत फल प्राप्ति, शत्रु का अत्यंत तीव्र मारण व समस्त भयंकर संकटों का नाश 39।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
तुरंत फल प्राप्ति, शत्रु का अत्यंत तीव्र मारण व समस्त भयंकर संकटों का नाश 39।
इस मंत्र से क्या होगा?
तुरंत फल प्राप्ति, शत्रु का अत्यंत तीव्र मारण व समस्त भयंकर संकटों का नाश
जाप विधि
अष्टमी के दिन साधक काले तिल, काली मिर्च और घी को समान अनुपात में मिलाकर इस मंत्र से 1000 आहुतियां दें (गुरु दीक्षा के पश्चात्) 38।
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ॐ त्रिपुरायै विद्महे महाभैरव्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥
jap mantraॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोगहराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा
gyan mantraसरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि । विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥
mool mantraॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः
kaamya mantraदेवि प्रसीद परिपालय नोऽरिभीतेर्नित्यं यथासुरवधादधुनैव सद्यः। पापानि सर्वजगतां प्रशमं नयाशु उत्पातपाकजनितांश्च महोपसर्गान्॥
kavach mantraॐ यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्। यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥ अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम्। देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व महामुने॥ प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी। तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥ पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥ नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः। उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥ शाकिनी तथा अंतरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्च महाबलाय प्रभु तपिश न धीर वृषभ वृषभ लो कुष्मांडा ब्रॉदर यह नश्यंति दर्शनात्तस्य कवचे 9