चामुण्डा (त्र्यक्षरी महा-उग्र मंत्र) उग्र मंत्र
क्लीं क्लीं हूं
माता के चण्ड-मुण्ड विनाशिनी उग्र स्वरूप का जागरण, घर की सब समस्याओं और प्रबल शत्रुओं का शमन 44।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
माता के चण्ड-मुण्ड विनाशिनी उग्र स्वरूप का जागरण, घर की सब समस्याओं और प्रबल शत्रुओं का शमन 44।
इस मंत्र से क्या होगा?
माता के चण्ड-मुण्ड विनाशिनी उग्र स्वरूप का जागरण, घर की सब समस्याओं और प्रबल शत्रुओं का शमन
जाप विधि
यह अत्यंत शक्तिशाली त्र्यक्षरी मंत्र है। बिना गुरु के इसका जाप पूर्णतः वर्जित है। इसे अत्यंत सावधानी से पूजा स्थान पर जाग्रत किया जाता है 44।
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शम्भुर्मे मस्तकं पातु मुखं पातु महेश्वरः। दन्तपङ्क्तिं च नीलकण्ठोऽप्यधरोष्ठं हरः स्वयम्। कण्ठं पातु चन्द्रचूडः स्कन्धौ वृषवाहनः। वक्षःस्थलं नीलकण्ठः पातु पृष्ठं दिगम्बरः। स्वप्ने जागरणे चैव स्थाणुर्मे पातु सन्ततम्। 8
siddh mantraॐ ऐं क्लीं सौः। क ए ल ह ह्रीं। सौः क्लीं ऐं। ॐ ऐं क्लीं सौः। क स क ह ल ह्रीं। सौः क्लीं ऐं। ॐ ऐं क्लीं सौः। स क ल ह्रीं । सौः क्लीं ऐं ॐ॥
jap mantraॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः
beej mantraखं
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shanti mantraॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥