ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
उग्र नृसिंह

उग्र नृसिंह उग्र मंत्र

ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥

मृत्यु और अकाल मृत्यु पर विजय, सर्वव्यापी उग्र ऊर्जा से रक्षा, मारण प्रयोग एवं भयंकर अस्त्रों से बचाव 27।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारउग्र मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

मृत्यु और अकाल मृत्यु पर विजय, सर्वव्यापी उग्र ऊर्जा से रक्षा, मारण प्रयोग एवं भयंकर अस्त्रों से बचाव 27।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

मृत्यु और अकाल मृत्यु पर विजय, सर्वव्यापी उग्र ऊर्जा से रक्षा, मारण प्रयोग एवं भयंकर अस्त्रों से बचाव

जाप विधि

प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। कुशा के आसन पर बैठकर रुद्राक्ष की माला से 108 बार जप करें। नृसिंह भगवान का ऋतुफल, पुष्प, पञ्चगव्य आदि से पूजन अनिवार्य है 27।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

siddh mantra

उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम् । नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम् ॥

sabar mantra

धन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5

dhyan mantra

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

gyan mantra

अयमात्मा ब्रह्म

navgrah mantra

ॐ केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेशसे। समुषद्भिरजायथा:।।

bhakti mantra

ॐ आदित्याय नमः