भगवान श्री गणेश भक्ति मंत्र
गणेश शरणं शरणं गणेश
भगवान गणेश के चरणों में पूर्ण शरणागति, अहंकार का त्याग और ईश्वरीय संरक्षण व निर्विघ्नता की साक्षात अनुभूति प्राप्त करना 17।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
भगवान गणेश के चरणों में पूर्ण शरणागति, अहंकार का त्याग और ईश्वरीय संरक्षण व निर्विघ्नता की साक्षात अनुभूति प्राप्त करना 17।
इस मंत्र से क्या होगा?
भगवान गणेश के चरणों में पूर्ण शरणागति, अहंकार का त्याग और ईश्वरीय संरक्षण व निर्विघ्नता की साक्षात अनुभूति प्राप्त करना
जाप विधि
यह एक अत्यंत सरल संकीर्तन व भाव-मंत्र है, जिसे बिना किसी माला के केवल भाव-जप के रूप में जपा जाता है 17। इसे कीर्तन के समय या किसी भी कठिन परिस्थिति में मानसिक रूप से निरंतर जपा जा सकता है 4।
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ॐ आप्यायन्तु ममाङ्गानि वाक्प्राणश्चक्षुः श्रोत्रमथो बलमिन्द्रियाणि च सर्वाणि । सर्वं ब्रह्मोपनिषदं माहं ब्रह्म निराकुर्यां मा मा ब्रह्म निराकरोदनिराकरणमस्त्वनिराकरणं मे अस्तु । तदात्मनि निरते य उपनिषत्सु धर्मास्ते मयि सन्तु ते मयि सन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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vaidik mantraॐ त्वं नो अग्ने महोभिः पाहि विश्वस्या अरातेः । उत द्विषो मर्त्यस्य ॥
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