युगल स्वरूप श्री सीता-रामचन्द्र भक्ति मंत्र
ॐ श्री सीतारामचन्द्राभ्यां नमः
हृदय में सीता और राम के युगल स्वरूप के प्रति दास्य और सखा भाव की जागृति करना, पारिवारिक जीवन में सामंजस्य स्थापित करना और भगवान के परम धाम की प्राप्ति हेतु समर्पण करना 14।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
हृदय में सीता और राम के युगल स्वरूप के प्रति दास्य और सखा भाव की जागृति करना, पारिवारिक जीवन में सामंजस्य स्थापित करना और भगवान के परम धाम की प्राप्ति हेतु समर्पण करना 14।
इस मंत्र से क्या होगा?
हृदय में सीता और राम के युगल स्वरूप के प्रति दास्य और सखा भाव की जागृति करना, पारिवारिक जीवन में सामंजस्य स्थापित करना और भगवान के परम धाम की प्राप्ति हेतु समर्पण करना
जाप विधि
इस युगल मंत्र का जप प्रातः और सांध्य वेला (संध्या काल) में किसी भी पवित्र आसन पर बैठकर किया जाता है 14। इसे बिना माला के भी अजपा जप की अवस्था में श्वास के साथ जोड़ा जा सकता है 4।
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