बुध नवग्रह मंत्र
ॐ ह्रां क्रीं टं ग्रहनाथाय बुधाय स्वाहा॥
तंत्रोक्त विद्याओं में तीव्र धारणा शक्ति (Memory), वाक्-सिद्धि (कही हुई बात का सत्य होना) और व्यापारिक सम्मोहन (ग्राहकों को आकर्षित करने की शक्ति) प्राप्त करने हेतु। 8
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
तंत्रोक्त विद्याओं में तीव्र धारणा शक्ति (Memory), वाक्-सिद्धि (कही हुई बात का सत्य होना) और व्यापारिक सम्मोहन (ग्राहकों को आकर्षित करने की शक्ति) प्राप्त करने हेतु। 8
इस मंत्र से क्या होगा?
तंत्रोक्त विद्याओं में तीव्र धारणा शक्ति (Memory), वाक्-सिद्धि (कही हुई बात का सत्य होना) और व्यापारिक सम्मोहन (ग्राहकों को आकर्षित करने की शक्ति) प्राप्त करने हेतु
जाप विधि
बुधवार के दिन हरे आसन पर उत्तर दिशा की ओर मुख करके भोजपत्र पर बने बुध यंत्र के समक्ष तुलसी माला से जप। 8
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श्रौं
jap mantraॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्वादिनी सरस्वती देवी मम जिव्हायां सर्वविद्यां देहि दापय स्वाहा
kavach mantraॐ सौवर्णासन-संस्थितां त्रिनयनां पीतांशुकोल्लासिनीम्। हेमाभांगरुचिं शशांक-मुकुटां सच्चम्पक स्रग्युताम्।। हस्तैर्मुद्गर पाश वज्ररसनाः संबिभ्रतीं भूषणैः। व्याप्तांगीं बगलामुखीं त्रिजगतां संस्तम्भिनीं चिन्तयेत्।। शिरो मे पातु ॐ ह्रीं ऐं श्रीं क्लीं पातु ललाटकम्। सम्बोधन-पदं पातु नेत्रे श्रीबगलानने।। श्रुतौ मम रिपुं पातु नासिकां नाशयद्वयम्। पातु गण्डौ सदा मामैश्वर्याण्यन्तं तु मस्तकम्।। देहि द्वन्द्वं सदा जिह्वां पातु शीघ्रं वचो मम। कण्ठदेशं मनः पातु वाञ्छितं बाहुमूलकम्।। कार्यं साधयद्वन्द्वं तु करौ पातु सदा मम। मायायुक्ता तथा स्वाहा हृदयं पातु सर्वदा।। अष्टाधिक चत्वारिंश दण्डाढया बगलामुखी। रक्षां करोतु सर्वत्र गृहेऽरण्ये सदा मम।। ब्रह्मास्त्राख्यो मनुः पातु सर्वांगे सर्व सन्धिषु। मन्त्रराजः सदा रक्षां करोतु मम सर्वदा।। ॐ ह्रीं पातु नाभिदेशं कटिं मे बगलाऽवतु। मुखिवर्णद्वयं पातु लिंग मे मुष्क-युग्मकम्।। जानुनी सर्वदुष्टानां पातु मे वर्णपञ्चकम्। वाचं मुखं तथा पादं षड्वर्णाः परमेश्वरी।। जंघायुग्मे सदा पातु बगला रिपुमोहिनी। स्तम्भयेति पदं पृष्ठं पातु वर्णत्रयं मम।। जिह्वा वर्णद्वयं पातु गुल्फौ मे कीलयेति च। पादोर्ध्व सर्वदा पातु बुद्धिं पादतले मम।। विनाशय पदं पातु पादांगुल्योर्नखानि मे। ह्रीं बीजं सर्वदा पातु बुद्धिन्द्रियवचांसि मे।। सर्वांगं प्रणवः पातु स्वाहा रोमाणि मेऽवतु। ब्राह्मी पूर्वदले पातु चाग्नेय्यां विष्णुवल्लभा।। माहेशी दक्षिणे पातु चामुण्डा राक्षसेऽवतु। कौमारी पश्चिमे पातु वायव्ये चापराजिता।। वाराही चोत्तरे पातु नारसिंही शिवेऽवतु। ऊर्ध्वं पातु महालक्ष्मीः पाताले शारदाऽवतु।। इत्यष्टौ शक्तयः पान्तु सायुधाश्च सवाहनाः। राजद्वारे महादुर्गे पातु मां गणनायकः।। श्मशाने जलमध्ये च भैरवश्च सदाऽवतु। द्विभुजा रक्तवसनाः सर्वाभरणभूषिताः।। योगिन्यः सर्वदा पान्तु महारण्ये सदा मम। इति ते कथितं देवि कवचं परमाद् भुतम्।। 13
stotra mantraयथैकात्म्यानुभावानां विकल्परहितः स्वयम्। भूषणायुद्धलिङ्गाख्या धत्ते शक्तीः स्वमायया। 7
shanti mantraॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
ugra mantraॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं असितांग भैरवाय, सर्व शाप विमोचनाय, मम कार्यं कुरु कुरु स्वाहा