ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
सूर्य

सूर्य नवग्रह मंत्र

जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्। तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥

महर्षि व्यास रचित इस पौराणिक मंत्र का उपयोग जन्मपत्रिका में सूर्य के पापक ग्रहों के साथ होने पर उत्पन्न अंधकार (निराशा) और अज्ञान को दूर करने, पूर्व जन्म के पाप कर्मों के शमन तथा दिन-प्रतिदिन के कार्य

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारनवग्रह मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

महर्षि व्यास रचित इस पौराणिक मंत्र का उपयोग जन्मपत्रिका में सूर्य के पापक ग्रहों के साथ होने पर उत्पन्न अंधकार (निराशा) और अज्ञान को दूर करने, पूर्व जन्म के पाप कर्मों के शमन तथा दिन-प्रतिदिन के कार्यों में आ रही अकारण अड़चनों को समाप्त करने हेतु किया जाता है। 13

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

महर्षि व्यास रचित इस पौराणिक मंत्र का उपयोग जन्मपत्रिका में सूर्य के पापक ग्रहों के साथ होने पर उत्पन्न अंधकार (निराशा) और अज्ञान को दूर करने, पूर्व जन्म के पाप कर्मों के शमन तथा दिन-प्रतिदिन के कार्यों में आ रही अकारण अड़चनों को समाप्त करने हेतु किया जाता है

जाप विधि

प्रतिदिन प्रातः काल सूर्य देव को तांबे के पात्र से कुमकुम, अक्षत और लाल पुष्प मिश्रित अर्घ्य (जल) देते समय या उसके तुरंत पश्चात पूर्व मुख होकर खड़े रहकर अथवा बैठकर एक सौ आठ बार इस श्लोक रूपी मंत्र का पाठ करना चाहिए। 12

विशेष टिप्पणियाँ

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