शुक्र नवग्रह मंत्र
ॐ भार्गवाय विद्महे असुराचार्याय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्।
कलात्मक कौशल का तीव्र विकास, जीवन के सौंदर्य बोध की समझ और सांसारिक व भौतिक बाधाओं का पूर्ण शमन। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
कलात्मक कौशल का तीव्र विकास, जीवन के सौंदर्य बोध की समझ और सांसारिक व भौतिक बाधाओं का पूर्ण शमन। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
कलात्मक कौशल का तीव्र विकास, जीवन के सौंदर्य बोध की समझ और सांसारिक व भौतिक बाधाओं का पूर्ण शमन
जाप विधि
नित्य प्रातः काल इक्कीस या एक सौ आठ बार पाठ। 16
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सोऽहम्
mool mantraदिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा
vaidik mantraॐ वाङ् म आस्येऽस्तु। ॐ नसोर्मे प्राणोऽस्तु। ॐ अक्ष्णोर्मे चक्षुरस्तु। ॐ कर्णयोर्मे श्रोत्रमस्तु। ॐ बाह्वोर्मे बलमस्तु। ॐ ऊर्वोर्मे ओजोऽस्तु। ॐ अरिष्टानि मेऽङ्गानि तनूस्तन्वा मे सह सन्तु॥
stotra mantraचक्रं युगान्तानलतिग्मनेमि भ्रमत् समन्ताद् भगवत्प्रयुक्तम्। दन्दग्धि दन्दग्ध्यरिसैन्यमासु कक्षं यथा वातसखो हुताशः।। 7
beej mantraग्रां
kaamya mantraॐ श्रीं महालक्ष्म्यै स्वाहा।