ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
शुक्र

शुक्र नवग्रह मंत्र

ॐ भार्गवाय विद्महे असुराचार्याय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्।

कलात्मक कौशल का तीव्र विकास, जीवन के सौंदर्य बोध की समझ और सांसारिक व भौतिक बाधाओं का पूर्ण शमन। 16

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारनवग्रह मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

कलात्मक कौशल का तीव्र विकास, जीवन के सौंदर्य बोध की समझ और सांसारिक व भौतिक बाधाओं का पूर्ण शमन। 16

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

कलात्मक कौशल का तीव्र विकास, जीवन के सौंदर्य बोध की समझ और सांसारिक व भौतिक बाधाओं का पूर्ण शमन

जाप विधि

नित्य प्रातः काल इक्कीस या एक सौ आठ बार पाठ। 16

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

mool mantra

दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा

shanti mantra

ॐ शं नो मित्रः शं वरुणः । शं नो भवत्वर्यमा । शं न इन्द्रो बृहस्पतिः । शं नो विष्णुरुरुक्रमः । नमो ब्रह्मणे । नमस्ते वायो । त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि । त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्म वदिष्यामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

ugra mantra

ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥

vaidik mantra

ॐ सूर्याचन्द्रमसौ धाता यथा पूर्वमकल्पयत् । दिवं च पृथिवीं च अन्तरिक्षमथो स्वः ॥

kaamya mantra

शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके। घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्यानिःस्वनेन च॥

beej mantra

धां