शुक्र नवग्रह मंत्र
ॐ भार्गवाय विद्महे असुराचार्याय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्।
कलात्मक कौशल का तीव्र विकास, जीवन के सौंदर्य बोध की समझ और सांसारिक व भौतिक बाधाओं का पूर्ण शमन। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
कलात्मक कौशल का तीव्र विकास, जीवन के सौंदर्य बोध की समझ और सांसारिक व भौतिक बाधाओं का पूर्ण शमन। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
कलात्मक कौशल का तीव्र विकास, जीवन के सौंदर्य बोध की समझ और सांसारिक व भौतिक बाधाओं का पूर्ण शमन
जाप विधि
नित्य प्रातः काल इक्कीस या एक सौ आठ बार पाठ। 16
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
पातु श्रवणे वासरेश्वर घ्राणं धर्म पातु पदन वेदवाहन जीवा मानद पातु कंठ में सुरवंदित स्कंद प्रभाकर पातु वक्ष पातु जन प्रिय पातु पाद द्वादशात्मा सर्व सर्वांग सकलेश्वर यक्ष गन्धर्व राक्षसाः ब्रह्मराक्षस वेतालाः क्षमा दूरा देव पलायंते तस्य संकीर्तना अज्ञात कवच दिव्य यो जपे सूर्य मंत्रम् सिद्धि जायते तस्य कल्पकोटि शतैरपि। इति श्री ब्रह्मयामले त्रैलोक्य मंगलम नाम सूर्य कवचम संपूर्णम। 15
stotra mantraसर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥ 24
mool mantraॐ वराहाय नमः
beej mantraक्लीं
jap mantraॐ उलटत नरसिंह पलटत काया एहिले नरसिंह तोहे बुलाया जो मोर नाम करत सो मरत परत भैरव चक्कर में उल्टी वेद उसी को लागे कार दुहाई बड़े वीर नरसिंह की दुहाई कामरो कामाख्या देवी की दुहाई अष्टभुज देवी कालिका की दुहाई शिव सतगुरु के बंदे पायो
tantrik mantraॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा अस्त्राय फट्