भगवती नारायणी काम्य मंत्र
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
सर्व कार्य सिद्धि, लौकिक कामनाओं की पूर्ति और सब प्रकार के कल्याण की प्राप्ति 28।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सर्व कार्य सिद्धि, लौकिक कामनाओं की पूर्ति और सब प्रकार के कल्याण की प्राप्ति 28।
इस मंत्र से क्या होगा?
सर्व कार्य सिद्धि, लौकिक कामनाओं की पूर्ति और सब प्रकार के कल्याण की प्राप्ति
जाप विधि
सम्पुट पाठ के रूप में अथवा नित्य १०८ बार रुद्राक्ष माला से देवी का ध्यान करते हुए जप 28।
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ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
sabar mantraधन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5
naam mantraमित्र
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jap mantraॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
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