देवी अपराजिता काम्य मंत्र
हारेण तु विचित्रेण भास्वत्कनकमेखला। अपराजिता भद्ररता करोतु विजयं मम॥
गम्भीर बीमारी, कोर्ट केस, प्रबल शत्रु, चुनाव, प्रतियोगिता और तंत्र बाधा आदि में पूर्ण विजय और अभूतपूर्व सफलता 24।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
गम्भीर बीमारी, कोर्ट केस, प्रबल शत्रु, चुनाव, प्रतियोगिता और तंत्र बाधा आदि में पूर्ण विजय और अभूतपूर्व सफलता 24।
इस मंत्र से क्या होगा?
गम्भीर बीमारी, कोर्ट केस, प्रबल शत्रु, चुनाव, प्रतियोगिता और तंत्र बाधा आदि में पूर्ण विजय और अभूतपूर्व सफलता
जाप विधि
२१ दिनों तक नित्य उच्च स्वर में ८ बार पाठ/जप करें 24।
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ॐ वाङ् मे मनसि प्रतिष्ठिता । मनो मे वाचि प्रतिष्ठितम् । आविरावीर्म एधि । वेदस्य म आणीस्थः । श्रुतं मे मा प्रहासीः । अनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
tantrik mantraॐ काल कालाय विद्महे कालातीताय धीमहि तन्नो भैरव प्रचोदयात्
kavach mantraशम्भुर्मे मस्तकं पातु मुखं पातु महेश्वरः। दन्तपङ्क्तिं च नीलकण्ठोऽप्यधरोष्ठं हरः स्वयम्। कण्ठं पातु चन्द्रचूडः स्कन्धौ वृषवाहनः। वक्षःस्थलं नीलकण्ठः पातु पृष्ठं दिगम्बरः। स्वप्ने जागरणे चैव स्थाणुर्मे पातु सन्ततम्। 8
dhyan mantraॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
jap mantraॐ उलटत नरसिंह पलटत काया एहिले नरसिंह तोहे बुलाया जो मोर नाम करत सो मरत परत भैरव चक्कर में उल्टी वेद उसी को लागे कार दुहाई बड़े वीर नरसिंह की दुहाई कामरो कामाख्या देवी की दुहाई अष्टभुज देवी कालिका की दुहाई शिव सतगुरु के बंदे पायो
navgrah mantraहिमकुंद मृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्। सर्वशास्त्र प्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम्॥