विशेष कामना के लिए
51 मंत्रनतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे। रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
समस्त पूर्वकृत पापों का नाश और भगवती की अनन्य भक्ति की प्राप्ति 28।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धनं मे देहि दास्योः स्वाहा।
घोर आर्थिक तंगी का निवारण, धन की प्राप्ति तथा नौकरी व व्यवसाय में अभूतपूर्व तरक्की 4।
शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके। घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्यानिःस्वनेन च॥
शत्रुओं और अस्त्र-शस्त्रों के प्रहार से साधक की हर दिशा में रक्षा 28।
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
सर्व कार्य सिद्धि, लौकिक कामनाओं की पूर्ति और सब प्रकार के कल्याण की प्राप्ति 28।
विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम्। रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
अपार रूप, अखण्ड यश, हर क्षेत्र में विजय की प्राप्ति और शत्रुओं का सर्वनाश (ऐहिक सुख और मोक्ष दोनों की सिद्धि) 28।
सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि। गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥
कार्यक्षेत्र में अपार सफलता हेतु शारीरिक, मानसिक और आत्मिक शक्ति की प्राप्ति 28।
सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥
जीवन की सभी भौतिक बाधाओं से मुक्ति पाकर अपार धन-धान्य और सुयोग्य संतान की प्राप्ति 28।
सर्वस्य बुद्धिरुपेण जनस्य हृदि संस्थिते। स्वर्गापवर्गदे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
इहलोक में सुखों को भोगकर मरणोपरांत स्वर्ग और परम मोक्ष की प्राप्ति 28।
देवि प्रसीद परिपालय नोऽरिभीतेर्नित्यं यथासुरवधादधुनैव सद्यः। पापानि सर्वजगतां प्रशमं नयाशु उत्पातपाकजनितांश्च महोपसर्गान्॥
विश्व के सभी पापों, भयंकर तापों (कष्टों) का निवारण और भयंकर उत्पातों से बचाव 28।
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः।
धन-वैभव, संपत्ति और आर्थिक सफलता की प्राप्ति 5।
विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु। त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् का ते स्तुतिः स्तव्यपरा परोक्तिः॥
समस्त प्रकार की विद्याओं और कलाओं की प्राप्ति तथा समाज की सभी स्त्रियों के प्रति मातृभाव की जागृति 28।
दुर्गे देवि नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थसाधिके। मम सिद्धिमसिद्धिं वा स्वप्ने सर्वं प्रदर्शय॥
किसी कार्य विशेष में सफलता (सिद्धि) मिलेगी या असफलता, इसका स्वप्न के माध्यम से पूर्व-आभास प्राप्त करना 28।
देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य। प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥
विश्वव्यापी भारी विपत्तियों का नाश और सम्पूर्ण चराचर जगत् की रक्षा 28।
ॐ पातु शिरसि नित्यं पातु ह्रीं कण्ठदेशके। नृसिंह पातु हृदये आपदुद्धारणाय च॥
शत्रु बाधा का तीव्र निवारण, अकाल मृत्यु का भय दूर करना और घोर जीवन-संकटों से रक्षा 25।
सर्वभूता यदा देवी स्वर्गमुक्तिप्रदायिनी। त्वं स्तुता स्तुतये का वा भवन्तु परमोक्तयः॥
मरणोपरांत स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति 28।
रक्षांसि यत्रोग्रविषाश्च नागा यत्रारयो दस्युबलानि यत्र। दावानलो यत्र तथाब्धिमध्ये तत्र स्थिता त्वं परिपासि विश्वम्॥
सर्प, चोर, डाकू, अग्नि और जल जैसी विविध प्राकृतिक व मानवनिर्मित विपत्तियों एवं उपद्रवों से रक्षा 28।
प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि। त्रैलोक्यवासिनामीड्ये लोकानां वरदा भव॥
जीवन में अकारण छाई उदासी का नाश, अपार प्रसन्नता एवं आत्म-संतुष्टि की प्राप्ति 28।
त्वं वैष्णवी शक्तिरनन्तवीर्या विश्वस्य बीजं परमासि माया। सम्मोहितं देवि समस्तमेतत् त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्तिहेतुः॥
सांसारिक मोह-माया से पूर्ण मुक्ति और परम मोक्ष की प्राप्ति 28।
देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूत्र्या। तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः॥
समाज, राष्ट्र और विश्व का सामूहिक कल्याण 28।
यस्याः प्रभावमतुलं भगवाननन्तो ब्रह्मा हरश्च न हि वक्तुमलं बलं च। सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालनाय नाशाय चाशुभभयस्य मतिं करोतु॥
संसार के समस्त अशुभ तत्वों और भय का समूल विनाश 28।
ॐ ह्रीं हूं हां ग्रें क्षों क्रों नमः॥
धन, धान्य, समृद्धि और जीवन में अष्ट-ऐश्वर्य की प्राप्ति 6।
विश्वेश्वरि त्वं परिपासि विश्वं विश्वात्मिका धारयसीति विश्वम्। विश्वेशवन्द्या भवती भवन्ति विश्वाश्रया ये त्वयि भक्तिनम्राः॥
सम्पूर्ण विश्व का अभ्युदय और समृद्धि 28।
नमः कमलवासिन्यै स्वाहा॥
अपार धन, वैभव और भौतिक सुखों की प्राप्ति 6।
श्रीं क्लीं श्रीं नमः॥
दरिद्रता का समूल नाश और स्थिर धन की प्राप्ति 6।
श्रीं क्लीं श्रीं॥
धन, धान्य और समृद्धि की प्राप्ति 6।
ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं॥
धन, समृद्धि एवं भौतिक सुखों की प्राप्ति 6।
ॐ क्लीं श्रीं ह्रीं जूं ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॐ स्वः भुवः भूः ॐ जूं ह्रीं श्रीं क्लीं ॐ।
उत्तम एवं बुद्धिमान संतान की प्राप्ति और सभी प्रकार की ज्योतिषीय या शारीरिक बाधाओं का शमन 17।
ॐ ऐं श्रीं महालक्ष्म्यै कमल-वारिण्यै गरुड़ वाहिन्यै श्रीं ह्रीं ऐं स्वाहा।
व्यापार में आर्थिक उन्नति, व्यापारिक बाधाओं का नाश और ग्राहकी वृद्धि 3।
स्ह्क्ल्रीं हं॥
धन एवं समृद्धि की प्राप्ति 6।
ॐ पार्वती वल्लभाय नमः।
बार-बार टूट रहे रिश्तों को जोड़ना और विवाह के मार्ग की समस्त बाधाएं समाप्त करना 15।
ॐ देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते। देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः॥
बार-बार हो रहे गर्भपात से रक्षा, गर्भधारण की बाधाओं का नाश और गुणवान, तेजस्वी संतान की प्राप्ति 16।
ॐ ऐं महासरस्वत्यै नमः।
अज्ञानता का नाश, एकाग्रता में वृद्धि और विद्या एवं ज्ञान में सफलता 19।
इन्द्र वाजेषु नोऽव सहस्त्रप्रधनेषु च। उग्र उग्राभिरूतिभिः॥
सहस्रों प्रकार के धन का लाभ और संकट काल में संग्रामों में वीरतापूर्वक रक्षा 23।
ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्तये मह्यं मेधां प्रज्ञां प्रयच्छ स्वाहा।
पढ़ाई में निश्चित सफलता, कुशाग्र बुद्धि (मेधा) और प्रज्ञा (विवेक) की प्राप्ति 21।
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ।
भूत-प्रेत, पिशाच, घोर नकारात्मक ऊर्जा और शत्रु बाधा से त्वरित मुक्ति, एवं कोर्ट-कचहरी में प्रबल विजय 27।
ॐ जूं सः माम्पालय पालय सः जूं ॐ
सभी प्रकार की शारीरिक व्याधियों और रोगों से शीघ्र आरोग्य प्राप्ति 9।
अच्युतानन्त गोविन्द नामोच्चारणभेषजात्। नश्यन्ति सकला रोगाः सत्यं सत्यं वदाम्यहम्॥
समस्त शारीरिक व मानसिक बीमारियों और रोगों का शत-प्रतिशत शमन 10।
इन्द्रं वयं महाधन इन्द्रमर्भे हवामहे। युजं वृत्रेषु वज्रिणम्॥
छोटे-बड़े सभी जीवन-संग्रामों और प्रतियोगिताओं में विजय तथा विपुल महाधन की प्राप्ति 23।
ॐ कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥
कन्याओं के विवाह में होने वाले अनावश्यक विलंब को दूर कर सुयोग्य पति की शीघ्र प्राप्ति 13।
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। तां म आ वह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्॥
जीवन में अपार धन, स्थिर समृद्धि और सुख-शांति का स्थायी आगमन 1।
ज्ञानानन्दमयं देवं निर्मलस्फटिकाकृतिम्। आधारं सर्वविद्यानां हयग्रीवमुपास्महे॥
असाधारण ज्ञान, मेधा, बुद्धि में वृद्धि और सभी प्रकार की कठिन विद्याओं में पारंगत होना 20।
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि। दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽर्द्रचित्ता॥
दरिद्रता, घोर दुःख और जीवन के हर प्रकार के भय का समूल विनाश 28।
ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
प्रबल शत्रुओं का शमन, घोर तंत्र-बाधा का विनाश और सर्व-भय नाश 26।
हारेण तु विचित्रेण भास्वत्कनकमेखला। अपराजिता भद्ररता करोतु विजयं मम॥
गम्भीर बीमारी, कोर्ट केस, प्रबल शत्रु, चुनाव, प्रतियोगिता और तंत्र बाधा आदि में पूर्ण विजय और अभूतपूर्व सफलता 24।
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
शारीरिक व्याधियों, असाध्य रोगों और अकाल मृत्यु के भय से पूर्ण मुक्ति एवं आरोग्य प्राप्ति 8।
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्रीं नमो भगवति मम समृद्धौ ज्वल ज्वल मां सर्व सम्पदं देहि देहि मम अलक्ष्मीं नाशय नाशय फट् स्वाहा।
पुराने और असाध्य कर्ज (ऋण) से शीघ्र मुक्ति एवं दरिद्रता का नाश 7।
ॐ ह्रीं योगिनि योगिनि योगेश्वरि योग भयङ्करि सकल स्थावर जङ्गमस्य मुख हृदयं मम वशं आकर्षय आकर्षय नमः।
विवाह में आ रही बाधाओं का अंत, मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति और वैवाहिक जीवन में अटूट प्रेम 11।
या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः। श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥
विश्व की रक्षा, सर्वत्र सुरक्षा और घोर आपदाओं से समाज की रक्षा 28।
ॐ नमः मनोवाहिनी वृषभासनाय धीमहि तन्नो गिरिजा प्रचोदयात्।
कुंडली के विवाह दोषों की शांति और शीघ्र शुभ विवाह के योग बनाना 15।
ॐ ऐं ऐं श्रीं श्रीं ह्रीं श्रीं पूर्ण पूर्ण वाक्सिद्धिं वाक्सिद्धिं दिव्यं दिव्यं आगच्छ आगच्छ ह्रीं श्रीं श्रीं ऐं ऐं ॐ ॐ नमः नमः।
कुशाग्र बुद्धि, प्रबल स्मरण शक्ति, वाक् सिद्धि और परीक्षाओं में शत-प्रतिशत सफलता 18।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै स्वाहा।
स्थिर धन-संपदा और ऐश्वर्य की निर्बाध प्राप्ति 3।