ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
इन्द्र देव (ऋग्वेद)

इन्द्र देव (ऋग्वेद) काम्य मंत्र

इन्द्र वाजेषु नोऽव सहस्त्रप्रधनेषु च। उग्र उग्राभिरूतिभिः॥

सहस्रों प्रकार के धन का लाभ और संकट काल में संग्रामों में वीरतापूर्वक रक्षा 23।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारकाम्य मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

सहस्रों प्रकार के धन का लाभ और संकट काल में संग्रामों में वीरतापूर्वक रक्षा 23।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

सहस्रों प्रकार के धन का लाभ और संकट काल में संग्रामों में वीरतापूर्वक रक्षा

जाप विधि

यज्ञीय कर्मों में अथवा प्रातःकाल पूर्ण पवित्रता के साथ जप 23।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

stotra mantra

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् । लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिहृद्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥ 12

mool mantra

ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये। वरवर्दा सर्वजन्म में वशमान्यै नमः

kavach mantra

क्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23

beej mantra

डं, ढं, णं, तं, थं, दं, धं, नं, पं, फं

shanti mantra

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः । सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

tantrik mantra

ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा