इन्द्र देव (ऋग्वेद) काम्य मंत्र
इन्द्र वाजेषु नोऽव सहस्त्रप्रधनेषु च। उग्र उग्राभिरूतिभिः॥
सहस्रों प्रकार के धन का लाभ और संकट काल में संग्रामों में वीरतापूर्वक रक्षा 23।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सहस्रों प्रकार के धन का लाभ और संकट काल में संग्रामों में वीरतापूर्वक रक्षा 23।
इस मंत्र से क्या होगा?
सहस्रों प्रकार के धन का लाभ और संकट काल में संग्रामों में वीरतापूर्वक रक्षा
जाप विधि
यज्ञीय कर्मों में अथवा प्रातःकाल पूर्ण पवित्रता के साथ जप 23।
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