भगवान विष्णु नाम मंत्र
हरि
जन्म-जन्मांतर के संचित पापों का हरण, कर्म बंधनों का कटना एवं शुद्ध चेतना का जागरण।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जन्म-जन्मांतर के संचित पापों का हरण, कर्म बंधनों का कटना एवं शुद्ध चेतना का जागरण।
इस मंत्र से क्या होगा?
जन्म-जन्मांतर के संचित पापों का हरण, कर्म बंधनों का कटना एवं शुद्ध चेतना का जागरण
जाप विधि
श्वास छोड़ते और लेते समय अजपा जप (निरंतर बिना प्रयास के)।
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jap mantraॐ नमो नारायणाय
mool mantraॐ ऐं ऐं मनो वाञ्छित सिद्धये ऐं ऐं ॐ
gyan mantraउद्गीथ प्रणवोद्गीत सर्व वागीश्वरेश्वर । सर्व वेदमया चिन्त्यः सर्वं बोधय बोधय ॥
kaamya mantraदेवि प्रसीद परिपालय नोऽरिभीतेर्नित्यं यथासुरवधादधुनैव सद्यः। पापानि सर्वजगतां प्रशमं नयाशु उत्पातपाकजनितांश्च महोपसर्गान्॥
kavach mantraशम्भुर्मे मस्तकं पातु मुखं पातु महेश्वरः। दन्तपङ्क्तिं च नीलकण्ठोऽप्यधरोष्ठं हरः स्वयम्। कण्ठं पातु चन्द्रचूडः स्कन्धौ वृषवाहनः। वक्षःस्थलं नीलकण्ठः पातु पृष्ठं दिगम्बरः। स्वप्ने जागरणे चैव स्थाणुर्मे पातु सन्ततम्। 8