भगवान शिव नाम मंत्र
पशुपतिनाथ
पाशविक प्रवृत्तियों (काम, क्रोध, लोभ) से मुक्ति एवं हृदय में करुणा का विकास।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
पाशविक प्रवृत्तियों (काम, क्रोध, लोभ) से मुक्ति एवं हृदय में करुणा का विकास।
इस मंत्र से क्या होगा?
पाशविक प्रवृत्तियों (काम, क्रोध, लोभ) से मुक्ति एवं हृदय में करुणा का विकास
जाप विधि
जीव-जंतुओं की सेवा करते समय या अपनी निम्न प्रवृत्तियों के उदय के समय स्मरण।
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ॐ पक्षि स्वाहा
kavach mantraस्कन्धौ पातु गजस्कन्धः स्तनौ विघ्नविनाशनः । हृदयं गणनाथस्तु हेरम्बो जठरं महान् ॥ धराधरः पातु पार्श्वौ पृष्ठं विघ्नहरः शुभः । लिङ्गं गुह्यं सदा पातु वक्रतुण्डो महाबलः ॥ गणक्रीडो जानुजङ्घे ऊरू मङ्गलमूर्तिमान् । एकदन्तो महाबुद्धिः पादौ गुल्फौ सदाऽवतु ॥ क्षिप्रप्रसादनो बाहू पाणी आशाप्रपूरकः । अङ्गुलीश्च नखान्पातु पद्महस्तोऽरिनाशनः ॥ सर्वाङ्गानि मयूरेशो विश्वव्यापी सदाऽवतु । अनुक्तमपि यत्स्थानं धूम्रकेतुः सदाऽवतु ॥ आमोदस्त्वग्रतः पातु प्रमोदः पृष्ठतोऽवतु । प्राच्यां रक्षतु बुद्धीश आग्नेय्यां सिद्धिदायकः ॥ दक्षिणस्यामुमापुत्रो नैऋत्यां तु गणेश्वरः । प्रतीच्यां विघ्नहर्ताऽव्याद्वायव्यां गजकर्णकः ॥ कौबेर्यां निधिपः पायादीशान्यामीशनन्दनः । दिवाऽव्यादेकदन्तस्तु रात्रौ सन्ध्यासु विघ्नहृत् ॥ 14
kaamya mantraश्रीं क्लीं श्रीं नमः॥
tantrik mantraऐं क्लीं सौः
bhakti mantraॐ आदित्याय नमः
navgrah mantraॐ ह्रां क्रीं टं ग्रहनाथाय बुधाय स्वाहा॥