भगवान शिव नाम मंत्र
पशुपतिनाथ
पाशविक प्रवृत्तियों (काम, क्रोध, लोभ) से मुक्ति एवं हृदय में करुणा का विकास।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
पाशविक प्रवृत्तियों (काम, क्रोध, लोभ) से मुक्ति एवं हृदय में करुणा का विकास।
इस मंत्र से क्या होगा?
पाशविक प्रवृत्तियों (काम, क्रोध, लोभ) से मुक्ति एवं हृदय में करुणा का विकास
जाप विधि
जीव-जंतुओं की सेवा करते समय या अपनी निम्न प्रवृत्तियों के उदय के समय स्मरण।
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धूं धूं तंत्र बंधम स्तंभय नाशाय ठ: ठ: फट्
kavach mantraऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्। जानुनी सेतुकृत् पातु जङ्घे दशमुखान्तकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः। एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्। पातालभूतलव्योम- चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः। रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति। जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः। वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। 34
shanti mantraॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु । सर्वेषां शान्तिर्भवतु । सर्वेषां पूर्णं भवतु । सर्वेषां मङ्गलं भवतु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
sabar mantraमाई नथिया पांचो बावरी पीर गोगा जहार वर तेरे साथ चले चलो इस्माइल जोगी चलो मेरे शब्द पर चलो सत्य पर धर्म पर चलो ना चलो तो आदि शक्ति कामाख्या की आन माता सहजा योगिन की आन शिवशंकर की आन शब्द साचा पेंड काचा देखो इस्माल जोगी तेरे शब्द का तमाशा सत्य का नाम आदेश आदेश आदेश 14
ugra mantraॐ नमो भगवते उग्र भैरवाय सर्वविघ्ननाशाय ठः ठः स्वाहा
mool mantraॐ सौं शरवणभवाय श्रीं ह्रीं क्लीं क्लौं सौं नमः