मेधा देवी (तत्त्वज्ञान प्रदायिनी) ज्ञान मंत्र
मेधां मे वरुणो ददातु मेधामग्निः प्रजापतिः । मेधामिन्द्रश्च वायुश्च मेधां धाता ददातु मे स्वाहा ॥
समस्त विद्याओं के 'तत्त्वज्ञान' को समझने की सूक्ष्म दृष्टि और कुशाग्रता 2।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
समस्त विद्याओं के 'तत्त्वज्ञान' को समझने की सूक्ष्म दृष्टि और कुशाग्रता 2।
इस मंत्र से क्या होगा?
समस्त विद्याओं के 'तत्त्वज्ञान' को समझने की सूक्ष्म दृष्टि और कुशाग्रता
जाप विधि
विद्या आरम्भ या मेधा वृद्धि अनुष्ठान के अंतर्गत सस्वर पाठ 2।
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इदमिन्द्र प्रति हव्यं गृभाय सत्याः सन्तु यजमानस्य कामाः
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shanti mantraॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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bhakti mantraजय श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानंद श्री अद्वैत गदाधर श्रीवासादि गौर भक्त वृन्द