मेधा देवी (तत्त्वज्ञान प्रदायिनी) ज्ञान मंत्र
मेधां मे वरुणो ददातु मेधामग्निः प्रजापतिः । मेधामिन्द्रश्च वायुश्च मेधां धाता ददातु मे स्वाहा ॥
समस्त विद्याओं के 'तत्त्वज्ञान' को समझने की सूक्ष्म दृष्टि और कुशाग्रता 2।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
समस्त विद्याओं के 'तत्त्वज्ञान' को समझने की सूक्ष्म दृष्टि और कुशाग्रता 2।
इस मंत्र से क्या होगा?
समस्त विद्याओं के 'तत्त्वज्ञान' को समझने की सूक्ष्म दृष्टि और कुशाग्रता
जाप विधि
विद्या आरम्भ या मेधा वृद्धि अनुष्ठान के अंतर्गत सस्वर पाठ 2।
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देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूत्र्या। तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः॥
mool mantraॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मये नमः
jap mantraॐ गण गणपतये नमः
sabar mantraरक्षपाल आठवा दंड क्षेत्रपाल भैरव हाथ भर खप्पर तेल सिंदूर रक्षपाल येता अष्ट भैरव सदा रहो कृपाल दंड हमारा पिंड का प्राण वज्र हो काया कर रक्षा काली का पूत आवे दंड जावे दंड सो काल भागे 12 कोस काला दंड शीर कंटक का फोड़ हमको रख दुष्ट को पक ऐता भैरव दंड मंत्र संपूर्ण भया श्री नाथ जी गुरु जी को आदेश आदेश सत्य नमो आदेश गुरु जी को आदेश ओम गुरु 10
beej mantraहूँ
dhyan mantraॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥