शुक्र नवग्रह मंत्र
ॐ प्र वः शुक्राय भानवे भरध्वं हव्यं मतिं चाग्नये सुपूतम्। यो दैव्यानि मानुषा जनूंष्यन्तर्विश्वानि विद्मना जिगाति।।
विचारों में पवित्रता, शारीरिक सौंदर्य, और ब्रह्मांडीय ऐश्वर्य के प्रबल आकर्षण हेतु विशिष्ट वैदिक यज्ञों व नित्य कर्म में प्रयोग। 19
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
विचारों में पवित्रता, शारीरिक सौंदर्य, और ब्रह्मांडीय ऐश्वर्य के प्रबल आकर्षण हेतु विशिष्ट वैदिक यज्ञों व नित्य कर्म में प्रयोग। 19
इस मंत्र से क्या होगा?
विचारों में पवित्रता, शारीरिक सौंदर्य, और ब्रह्मांडीय ऐश्वर्य के प्रबल आकर्षण हेतु विशिष्ट वैदिक यज्ञों व नित्य कर्म में प्रयोग
जाप विधि
शुक्रवार के दिन सूर्योदय के समय श्वेत वस्त्र धारण कर स्फटिक माला से जप। 19
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