शुक्र नवग्रह मंत्र
ॐ प्र वः शुक्राय भानवे भरध्वं हव्यं मतिं चाग्नये सुपूतम्। यो दैव्यानि मानुषा जनूंष्यन्तर्विश्वानि विद्मना जिगाति।।
विचारों में पवित्रता, शारीरिक सौंदर्य, और ब्रह्मांडीय ऐश्वर्य के प्रबल आकर्षण हेतु विशिष्ट वैदिक यज्ञों व नित्य कर्म में प्रयोग। 19
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
विचारों में पवित्रता, शारीरिक सौंदर्य, और ब्रह्मांडीय ऐश्वर्य के प्रबल आकर्षण हेतु विशिष्ट वैदिक यज्ञों व नित्य कर्म में प्रयोग। 19
इस मंत्र से क्या होगा?
विचारों में पवित्रता, शारीरिक सौंदर्य, और ब्रह्मांडीय ऐश्वर्य के प्रबल आकर्षण हेतु विशिष्ट वैदिक यज्ञों व नित्य कर्म में प्रयोग
जाप विधि
शुक्रवार के दिन सूर्योदय के समय श्वेत वस्त्र धारण कर स्फटिक माला से जप। 19
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क्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23
gyan mantraॐ अर्हं मुखकमलवासिनी पापात्मक्षयंकारी वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा ॥
vaidik mantraॐ येन कर्मण्यपसो मनीषिणो यज्ञे कृण्वन्ति विदथेषु धीराः । यदपूर्वं यक्षमन्तः प्रजानां तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।
jap mantraॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
tantrik mantraॐ नाशय नाशय सर्व दुष्टं नाशय फट् स्वाहा अरुण वरुण माला लंकृता शंकराग्रे विद्रुत परसु शक्तिम पुष्प बाणुचापंम विविध फण फणंद्र भूषण भूषितंग शरबिलनाथं नौम्य सालुवे
stotra mantraवसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय। चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै व काराय नमः शिवाय॥ 19