भगवान श्री कृष्ण भक्ति मंत्र
गोविन्द हरे गोपाल हरे, हे प्रभु दीन दयाला
भगवान की दीन-दयाल वृत्ति को पुकारकर सांसारिक कष्टों से सुरक्षा मांगना, अहंकार का पूर्ण त्याग करना और ईश्वर के चरणों में दीनता के साथ शरणागति स्वीकार करना 16।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
भगवान की दीन-दयाल वृत्ति को पुकारकर सांसारिक कष्टों से सुरक्षा मांगना, अहंकार का पूर्ण त्याग करना और ईश्वर के चरणों में दीनता के साथ शरणागति स्वीकार करना 16।
इस मंत्र से क्या होगा?
भगवान की दीन-दयाल वृत्ति को पुकारकर सांसारिक कष्टों से सुरक्षा मांगना, अहंकार का पूर्ण त्याग करना और ईश्वर के चरणों में दीनता के साथ शरणागति स्वीकार करना
जाप विधि
यह आर्त भाव (पुकारने की अवस्था) का मंत्र है जिसे विपत्ति के समय या नित्य प्रार्थना में करुणापूर्ण स्वर में गाया या जपा जाता है 16। इसे उपांशु जप (जिसमें केवल होंठ हिलें) के माध्यम से जपना मन को शीघ्र शांत करता है 1।
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ॐ
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shanti mantraॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पुर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥