शनि मूल मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः (सामान्य मूल: ॐ शनैश्चराय नमः)
साढ़ेसाती एवं ढैय्या के घातक प्रभावों का शमन, वात रोगों से बचाव, कष्टों से मुक्ति, जीवन में अनुशासन एवं कर्मक्षेत्र में विजय 47।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
साढ़ेसाती एवं ढैय्या के घातक प्रभावों का शमन, वात रोगों से बचाव, कष्टों से मुक्ति, जीवन में अनुशासन एवं कर्मक्षेत्र में विजय 47।
इस मंत्र से क्या होगा?
साढ़ेसाती एवं ढैय्या के घातक प्रभावों का शमन, वात रोगों से बचाव, कष्टों से मुक्ति, जीवन में अनुशासन एवं कर्मक्षेत्र में विजय
जाप विधि
शनिवार को सायं काल या गोधूलि बेला में नीले या काले वस्त्र धारण कर पश्चिम दिशा की ओर मुख करके रुद्राक्ष या काले हकीक की माला से जप करें। अनुष्ठान हेतु ४० दिनों में २३,००० जप अनिवार्य हैं 47।
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