माँ सरस्वती नाम मंत्र
वाग्देवी
वाक्-सिद्धि, स्पष्ट उच्चारण एवं विचारों को श्रोताओं के सम्मुख सही रूप में प्रस्तुत करना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
वाक्-सिद्धि, स्पष्ट उच्चारण एवं विचारों को श्रोताओं के सम्मुख सही रूप में प्रस्तुत करना।
इस मंत्र से क्या होगा?
वाक्-सिद्धि, स्पष्ट उच्चारण एवं विचारों को श्रोताओं के सम्मुख सही रूप में प्रस्तुत करना
जाप विधि
परीक्षा, भाषण या साक्षात्कार (Interview) में जाने से पूर्व मानसिक जप।
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ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः । भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवागँसस्तनूभिः । व्यशेम देवहितं यदायूः । स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः । स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः । स्वस्ति नस्ताक्षर्यो अरिष्टनेमिः । स्वस्ति नो वृहस्पतिर्दधातु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
jap mantraॐ नमो नृसिंहाय हिरण्यकश्यप-वक्ष-स्थल-विदारणाय त्रिभुवनव्यापकाय भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी कुलोन्मूल नाशाय स्तम्भोद्भवाय समस्तदोषान् हर-हर विसर-विसर पच-पच-हन-हन-कम्पय-कम्पय मथ-मथ ह्रीं ह्रीं फट् फट् एह्येहि रुद्र आज्ञापयति स्वाहा
tantrik mantraॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्
dhyan mantraबर्हापीडं नटवरवपुः कर्णयोः कर्णिकारं बिभ्रद्वासः कनककपिशं वैजयन्तीं च मालाम्। रन्ध्रान् वेणोरधरसुधया पूरयन् गोपवृन्दैर्वृन्दारण्यं स्वपदरमणं प्राविशद् गीतकीर्तिः॥
ugra mantraॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीये हूं हूं फट् स्वाहा
sabar mantraकाल भैरव का जो नाम ले नर नारी उसके लिए मूठ कभी ना पड़े भारी जय जय काल भैरव देव मूठ चली हवा बनकर काल भैरव चले ढाल बनकर अष्ट हाथ भैरव जी के फैले काट दी जड़ मूठ की चढ़ा दी आकाश नीचे काटी ऊपर काटी काट दी पाताल में 11