ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
काल भैरव मूठ एवं तंत्र काट साधना

काल भैरव मूठ एवं तंत्र काट साधना शाबर मंत्र

काल भैरव का जो नाम ले नर नारी उसके लिए मूठ कभी ना पड़े भारी जय जय काल भैरव देव मूठ चली हवा बनकर काल भैरव चले ढाल बनकर अष्ट हाथ भैरव जी के फैले काट दी जड़ मूठ की चढ़ा दी आकाश नीचे काटी ऊपर काटी काट दी पाताल में 11

अघोर और वाम-मार्ग विद्या में 'मूठ' मारण का सबसे घातक स्वरूप है, जिसे हवा के माध्यम से सीधे लक्ष्य के प्राण हरने के लिए निर्देशित किया जाता है। इस मंत्र का विशुद्ध प्रयोजन उस 'हवा बनकर आती हुई' मारण मू

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारशाबर मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

अघोर और वाम-मार्ग विद्या में 'मूठ' मारण का सबसे घातक स्वरूप है, जिसे हवा के माध्यम से सीधे लक्ष्य के प्राण हरने के लिए निर्देशित किया जाता है। इस मंत्र का विशुद्ध प्रयोजन उस 'हवा बनकर आती हुई' मारण मूठ को काल भैरव की अतीन्द्रिय ढाल के माध्यम से टकरा कर शून्य में विलीन करना है 11। मंत्र की विशिष्ट ध्वनि-संरचना से काल भैरव जी के सूक्ष्म 'अष्ट-भुजाओं' (आठ हाथों) का विस्तार होता है, जो पाताल से लेकर आकाश तक किसी भी दिशा से आ रहे तांत्रिक हमले की जड़ को काट देते हैं। इसके प्रभाव से पीड़ित नर-नारी के प्राणों की तत्काल रक्षा होती है और मूठ का मारक प्रभाव उनके जीवन पर कभी भारी नहीं पड़ता 11।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

अघोर और वाम-मार्ग विद्या में 'मूठ' मारण का सबसे घातक स्वरूप है, जिसे हवा के माध्यम से सीधे लक्ष्य के प्राण हरने के लिए निर्देशित किया जाता है

02

इस मंत्र का विशुद्ध प्रयोजन उस 'हवा बनकर आती हुई' मारण मूठ को काल भैरव की अतीन्द्रिय ढाल के माध्यम से टकरा कर शून्य में विलीन करना है 11

03

मंत्र की विशिष्ट ध्वनि-संरचना से काल भैरव जी के सूक्ष्म 'अष्ट-भुजाओं' (आठ हाथों) का विस्तार होता है, जो पाताल से लेकर आकाश तक किसी भी दिशा से आ रहे तांत्रिक हमले की जड़ को काट देते हैं

04

इसके प्रभाव से पीड़ित नर-नारी के प्राणों की तत्काल रक्षा होती है और मूठ का मारक प्रभाव उनके जीवन पर कभी भारी नहीं पड़ता

जाप विधि

यह अघोर और शाबर तंत्र का एक अचूक 'तंत्र-काट' मंत्र है जिसका उपयोग विशेष रूप से तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति पर प्राणघातक 'मूठ' (काले जादू का सर्वाधिक उग्र रूप, जिसे हवा में मंत्रित सामग्री के रूप में भेजा जाता है) छोड़ी गई हो 11। इसकी प्राथमिक सिद्धि के लिए साधक को भैरव जी के जाग्रत मंदिर में या श्मशान की बाह्य सीमा पर बैठकर लगातार 21 या 41 दिनों तक इसका रात्रिकालीन जप कर ऊर्जा संचित करनी होती है। किसी पीड़ित व्यक्ति पर हुए प्राणघातक तांत्रिक प्रहार को काटने के लिए साधक अपने हाथ में शुद्ध जल, श्मशान/हवन की भस्म या पीली राई (सरसों) लेकर इस मंत्र का 21 बार उच्च स्वर में उच्चारण करता है। अभिमंत्रित होने के पश्चात उस सामग्री को दसों दिशाओं (आकाश, पाताल, ऊपर, नीचे और चारों ओर) में पूरी शक्ति से फेंका जाता है, जिससे भैरव जी की ऊर्जा एक अदृश्य और अभेद्य ढाल (Energetic Shield) का निर्माण करती है 11।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

kavach mantra

स्कन्धौ पातु गजस्कन्धः स्तनौ विघ्नविनाशनः । हृदयं गणनाथस्तु हेरम्बो जठरं महान् ॥ धराधरः पातु पार्श्वौ पृष्ठं विघ्नहरः शुभः । लिङ्गं गुह्यं सदा पातु वक्रतुण्डो महाबलः ॥ गणक्रीडो जानुजङ्घे ऊरू मङ्गलमूर्तिमान् । एकदन्तो महाबुद्धिः पादौ गुल्फौ सदाऽवतु ॥ क्षिप्रप्रसादनो बाहू पाणी आशाप्रपूरकः । अङ्गुलीश्च नखान्पातु पद्महस्तोऽरिनाशनः ॥ सर्वाङ्गानि मयूरेशो विश्वव्यापी सदाऽवतु । अनुक्तमपि यत्स्थानं धूम्रकेतुः सदाऽवतु ॥ आमोदस्त्वग्रतः पातु प्रमोदः पृष्ठतोऽवतु । प्राच्यां रक्षतु बुद्धीश आग्नेय्यां सिद्धिदायकः ॥ दक्षिणस्यामुमापुत्रो नैऋत्यां तु गणेश्वरः । प्रतीच्यां विघ्नहर्ताऽव्याद्वायव्यां गजकर्णकः ॥ कौबेर्यां निधिपः पायादीशान्यामीशनन्दनः । दिवाऽव्यादेकदन्तस्तु रात्रौ सन्ध्यासु विघ्नहृत् ॥ 14

shanti mantra

ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः । वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

kaamya mantra

सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि। गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥

navgrah mantra

ॐ शं शनैश्चराय नमः

beej mantra

ग्लौं

stotra mantra

मेघश्यामं पीतकौशेयवासं श्रीवत्साङ्कं कौस्तुभोद्भासिताङ्गम् । पुण्योपेतं पुण्डरीकायताक्षं विष्णुं वन्दे सर्वलोकैकनाथम् ॥ 12