राहु नवग्रह मंत्र
ॐ नाकध्वजाय विद्महे पद्महस्ताय धीमहि तन्नो राहुः प्रचोदयात्।
सर्प भय निवारण, छिपे हुए खजाने या गुप्त धन की प्राप्ति और अतीन्द्रिय क्षमता (Sixth sense) के विकास हेतु। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सर्प भय निवारण, छिपे हुए खजाने या गुप्त धन की प्राप्ति और अतीन्द्रिय क्षमता (Sixth sense) के विकास हेतु। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
सर्प भय निवारण, छिपे हुए खजाने या गुप्त धन की प्राप्ति और अतीन्द्रिय क्षमता (Sixth sense) के विकास हेतु
जाप विधि
ग्रहण काल या अमावस्या की रात्रि में एक सौ आठ बार जप। 16
विशेष टिप्पणियाँ
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गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥
beej mantraश्रां
sabar mantraमाई नथिया पांचो बावरी पीर गोगा जहार वर तेरे साथ चले चलो इस्माइल जोगी चलो मेरे शब्द पर चलो सत्य पर धर्म पर चलो ना चलो तो आदि शक्ति कामाख्या की आन माता सहजा योगिन की आन शिवशंकर की आन शब्द साचा पेंड काचा देखो इस्माल जोगी तेरे शब्द का तमाशा सत्य का नाम आदेश आदेश आदेश 14
kavach mantraनासिकां पातु मे लक्ष्मीः कमला पातु लोचनम् ॥ ॐ श्रीं पद्मालयायै स्वाहा वक्षः सदावतु ॥ पातु श्रीर्मम कंकालं बाहुयुग्मं च ते नमः ॥ ओम ह्रीम श्रीम लक्ष्मी नमः चिरकाल तक मेरे पैरों का पालन करें ओम ह्रीम श्रीम नमः पद्माए स्वाहा नितम भाग की रक्षा करें ओम श्रीम महालक्ष्मी स्वाहा मेरे सर्वांग की सदा रक्षा करें ओम ह्रीम श्रीम क्लीम महालक्ष्मी स्वाहा आद्या शक्ति महालक्ष्मी भक्तानुग्रहकारिणी धारके पाठके चैव निश्चला निवसे ध्रुवं तंत्रोक्तम लक्ष्मी कवच संपूर्ण ओम 31
kaamya mantraॐ कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥
mool mantraॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः (सामान्य मूल: ॐ बुधाय नमः)