चंद्र नवग्रह मंत्र
दधिशंख तुषाराभं क्षीरोदार्णव सम्भवम्। नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुट भूषणम्॥
महर्षि व्यास रचित यह मंत्र मन की एकाग्रता, मुख के सौंदर्य में वृद्धि, कल्पनाशीलता का विकास तथा चंद्र-राहु युति जनित भ्रम (Phobias) को दूर कर शिव कृपा के माध्यम से मानसिक शीतलता प्राप्त करने हेतु उपयोग
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यह मंत्र क्यों?
महर्षि व्यास रचित यह मंत्र मन की एकाग्रता, मुख के सौंदर्य में वृद्धि, कल्पनाशीलता का विकास तथा चंद्र-राहु युति जनित भ्रम (Phobias) को दूर कर शिव कृपा के माध्यम से मानसिक शीतलता प्राप्त करने हेतु उपयोग होता है। 13
इस मंत्र से क्या होगा?
महर्षि व्यास रचित यह मंत्र मन की एकाग्रता, मुख के सौंदर्य में वृद्धि, कल्पनाशीलता का विकास तथा चंद्र-राहु युति जनित भ्रम (Phobias) को दूर कर शिव कृपा के माध्यम से मानसिक शीतलता प्राप्त करने हेतु उपयोग होता है
जाप विधि
प्रतिदिन सायं काल चंद्रोदय के पश्चात् या भगवान शिव की उपासना के साथ उत्तर-पश्चिम मुख होकर एक सौ आठ बार इस श्लोक रूपी मंत्र का पाठ करें। 12
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सुधाकर
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bhakti mantraश्री राम जय राम कोदण्ड राम
tantrik mantraॐ स्वर्णाकर्षण भैरवं देवं सर्व शक्ति समन्वितम् सर्व अभीष्ट फलं देहि श्री क्षेत्रपाल नमोस्तुते
stotra mantraबंधु समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पाताल सिधारो । देबिहिं पूजि भली बिधि सों बलि, देउ सबै मिति मंत्र बिचारो ॥ जाय सहाय भयो तब ही, अहिरावण सैन्य समेत सँहारो । को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 40
vaidik mantraॐ अग्न आ याहि वीतये गृणानो हव्यदातये । नि होता सत्सि बर्हिषि ॥