सुमुखी मातंगी उग्र मंत्र
उच्छिष्ट चांडालिनी सुमुखी देवी महापिशाचिनी ह्रीं ठः ठः ठः
उग्र प्रभाव की उत्पत्ति, तीव्र वशीकरण तथा महा-पिशाचिनी शक्तियों पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना 5।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
उग्र प्रभाव की उत्पत्ति, तीव्र वशीकरण तथा महा-पिशाचिनी शक्तियों पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना 5।
इस मंत्र से क्या होगा?
उग्र प्रभाव की उत्पत्ति, तीव्र वशीकरण तथा महा-पिशाचिनी शक्तियों पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना
जाप विधि
वाम मार्ग या कौल तंत्र के अंतर्गत गुरु दीक्षा के पश्चात् विशिष्ट और गुप्त तांत्रिक विधान से एकांत में जप 5।
विशेष टिप्पणियाँ
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ॐ पुनन्तु मा देवजनाः पुनन्तु मनसा धियः । पुनन्तु विश्वा भूतानि जातवेदः पुनीहि मा ॥
stotra mantraविज्ञानवृद्धिं हृदये कुरु श्रीः सौभाग्यवृद्धिं कुरु मे गृहे श्रीः । दयासुवृद्धिं कुरुतां मयि श्रीः सुवर्णवृद्धिं कुरु मे गृहे श्रीः ॥ 27
dhyan mantraविशोका वा ज्योतिष्मती
beej mantraशं
kavach mantraनासिकां पातु मे लक्ष्मीः कमला पातु लोचनम् ॥ ॐ श्रीं पद्मालयायै स्वाहा वक्षः सदावतु ॥ पातु श्रीर्मम कंकालं बाहुयुग्मं च ते नमः ॥ ओम ह्रीम श्रीम लक्ष्मी नमः चिरकाल तक मेरे पैरों का पालन करें ओम ह्रीम श्रीम नमः पद्माए स्वाहा नितम भाग की रक्षा करें ओम श्रीम महालक्ष्मी स्वाहा मेरे सर्वांग की सदा रक्षा करें ओम ह्रीम श्रीम क्लीम महालक्ष्मी स्वाहा आद्या शक्ति महालक्ष्मी भक्तानुग्रहकारिणी धारके पाठके चैव निश्चला निवसे ध्रुवं तंत्रोक्तम लक्ष्मी कवच संपूर्ण ओम 31
jap mantraॐ श्रीं कृष्णाय श्रीं श्रीं श्रीं गोविन्दाय गोपालाय गोलोक सुन्दराय सत्याय नित्याय परमात्मने पराय वैखानसाय वैराजमूर्तये मेघात्मने श्रीं नरसिंहवपुषे नमः