विपरीत प्रत्यंगिरा (अरिष्ट निवारक) उग्र मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं प्रत्यंगिरे मां रक्ष रक्ष मम शत्रून् भंजय-भंजय हुं फट् स्वाहा
आर्थिक, मानसिक और सामाजिक क्षति पहुंचाने वाले शत्रु का दमन, राजकीय व प्रशासनिक बाधा निवारण, तथा खोया हुआ पद व गरिमा पुनः प्राप्त करना 4।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
आर्थिक, मानसिक और सामाजिक क्षति पहुंचाने वाले शत्रु का दमन, राजकीय व प्रशासनिक बाधा निवारण, तथा खोया हुआ पद व गरिमा पुनः प्राप्त करना 4।
इस मंत्र से क्या होगा?
आर्थिक, मानसिक और सामाजिक क्षति पहुंचाने वाले शत्रु का दमन, राजकीय व प्रशासनिक बाधा निवारण, तथा खोया हुआ पद व गरिमा पुनः प्राप्त करना
जाप विधि
अपनी देह की रक्षा हेतु दशों दिशाओं का दिग्बंध कर (ॐ भूर्भुव स्वः बोलते हुए चुटकी बजाकर), करन्यास व हृदयादिन्यास विधि के साथ जप 4।
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