विपरीत प्रत्यंगिरा (अरिष्ट निवारक) उग्र मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं प्रत्यंगिरे मां रक्ष रक्ष मम शत्रून् भंजय-भंजय हुं फट् स्वाहा
आर्थिक, मानसिक और सामाजिक क्षति पहुंचाने वाले शत्रु का दमन, राजकीय व प्रशासनिक बाधा निवारण, तथा खोया हुआ पद व गरिमा पुनः प्राप्त करना 4।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
आर्थिक, मानसिक और सामाजिक क्षति पहुंचाने वाले शत्रु का दमन, राजकीय व प्रशासनिक बाधा निवारण, तथा खोया हुआ पद व गरिमा पुनः प्राप्त करना 4।
इस मंत्र से क्या होगा?
आर्थिक, मानसिक और सामाजिक क्षति पहुंचाने वाले शत्रु का दमन, राजकीय व प्रशासनिक बाधा निवारण, तथा खोया हुआ पद व गरिमा पुनः प्राप्त करना
जाप विधि
अपनी देह की रक्षा हेतु दशों दिशाओं का दिग्बंध कर (ॐ भूर्भुव स्वः बोलते हुए चुटकी बजाकर), करन्यास व हृदयादिन्यास विधि के साथ जप 4।
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मदनमोहन
shanti mantraॐ आप्यायन्तु ममाङ्गानि वाक्प्राणश्चक्षुः श्रोत्रमथो बलमिन्द्रियाणि च सर्वाणि । सर्वं ब्रह्मोपनिषदं माहं ब्रह्म निराकुर्यां मा मा ब्रह्म निराकरोदनिराकरणमस्त्वनिराकरणं मे अस्तु । तदात्मनि निरते य उपनिषत्सु धर्मास्ते मयि सन्तु ते मयि सन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
kavach mantraऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्। जानुनी सेतुकृत् पातु जङ्घे दशमुखान्तकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः। एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्। पातालभूतलव्योम- चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः। रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति। जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः। वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। 34
sabar mantraओम गुरु जी शिव बैठे कैलाश विष्णु बैठे बैकुंठ मेरी भक्ति शिव की शक्ति पूजू अमुक देव मनाऊं तो आवे ना आवे तो दुहाई शिव शंकर की दुहाई माता काली की दुहाई गुरु गोरखनाथ की 1
dhyan mantraमनोबुद्ध्यहङ्कारचित्तानि नाहं न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे। न च व्योम भूमिर्न तेजो न वायुश्चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥
beej mantraश्रीं