विपरीत प्रत्यंगिरा (अरिष्ट निवारक) उग्र मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं प्रत्यंगिरे मां रक्ष रक्ष मम शत्रून् भंजय-भंजय हुं फट् स्वाहा
आर्थिक, मानसिक और सामाजिक क्षति पहुंचाने वाले शत्रु का दमन, राजकीय व प्रशासनिक बाधा निवारण, तथा खोया हुआ पद व गरिमा पुनः प्राप्त करना 4।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
आर्थिक, मानसिक और सामाजिक क्षति पहुंचाने वाले शत्रु का दमन, राजकीय व प्रशासनिक बाधा निवारण, तथा खोया हुआ पद व गरिमा पुनः प्राप्त करना 4।
इस मंत्र से क्या होगा?
आर्थिक, मानसिक और सामाजिक क्षति पहुंचाने वाले शत्रु का दमन, राजकीय व प्रशासनिक बाधा निवारण, तथा खोया हुआ पद व गरिमा पुनः प्राप्त करना
जाप विधि
अपनी देह की रक्षा हेतु दशों दिशाओं का दिग्बंध कर (ॐ भूर्भुव स्वः बोलते हुए चुटकी बजाकर), करन्यास व हृदयादिन्यास विधि के साथ जप 4।
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ॐ नमो महा पाशुपतास्त्राय स्मरण मात्रेण प्रकटय प्रकटय शीघ्रं आगच्छ आगच्छ मम सर्व शत्रु सैन्यं विध्वंसय विध्वंसय मारय मारय हुं फट्
bhakti mantraॐ श्री कालिकायै नमः
kavach mantraनासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
beej mantraस्रां
dhyan mantraवसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्। देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥
sabar mantraराम कुण्डली, ब्रह्मचाक । तेतीस कोटि देवा देवा अमुक की बेड़ियां । अमुकेर अंकेर बाण काटम्। शर काटम् । संधान काटम् । कुज्ञान काटम् । कारवणे काटे । राजा रामचन्द्रेर आज्ञा । राजा रामचन्द्ररे ऐई झण्डी अमुकेर अंगे शीघ्र लागूगे 25