बटुक भैरव (आपत्ति उद्धारण स्वरूप) उग्र मंत्र
ॐ ह्रीं बं बटुकाय मम आपत्ति उद्धारणाय। कुरु कुरु बटुकाय बं ह्रीं ॐ फट स्वाहा
मारक ग्रह दोष (विशेषकर शनि की साढ़े साती या ढैय्या) निवारण, मृत्यु भय नाश, और जीवन में आई भयंकर आपत्ति और प्राणघातक संकटों से तत्काल उद्धार 18।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
मारक ग्रह दोष (विशेषकर शनि की साढ़े साती या ढैय्या) निवारण, मृत्यु भय नाश, और जीवन में आई भयंकर आपत्ति और प्राणघातक संकटों से तत्काल उद्धार 18।
इस मंत्र से क्या होगा?
मारक ग्रह दोष (विशेषकर शनि की साढ़े साती या ढैय्या) निवारण, मृत्यु भय नाश, और जीवन में आई भयंकर आपत्ति और प्राणघातक संकटों से तत्काल उद्धार
जाप विधि
कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव की मूर्ति या यंत्र के समक्ष तेल का दीपक जलाकर, धूप और काले तिल अर्पित करें। रुद्राक्ष या काले हकीक की माला से 108 बार जाप करें। साधना में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है 18।
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सोऽहम्
shanti mantraॐ वाङ् मे मनसि प्रतिष्ठिता । मनो मे वाचि प्रतिष्ठितम् । आविरावीर्म एधि । वेदस्य म आणीस्थः । श्रुतं मे मा प्रहासीः । अनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
beej mantraक्रौं
kavach mantraपातु श्रवणे वासरेश्वर घ्राणं धर्म पातु पदन वेदवाहन जीवा मानद पातु कंठ में सुरवंदित स्कंद प्रभाकर पातु वक्ष पातु जन प्रिय पातु पाद द्वादशात्मा सर्व सर्वांग सकलेश्वर यक्ष गन्धर्व राक्षसाः ब्रह्मराक्षस वेतालाः क्षमा दूरा देव पलायंते तस्य संकीर्तना अज्ञात कवच दिव्य यो जपे सूर्य मंत्रम् सिद्धि जायते तस्य कल्पकोटि शतैरपि। इति श्री ब्रह्मयामले त्रैलोक्य मंगलम नाम सूर्य कवचम संपूर्णम। 15
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