धूमावती उग्र मंत्र
॥ धूं धूं धूमावती ठ: ठ: ॥
महा-शत्रु का मारण और स्तंभन, जीवन से दरिद्रता का नाश, गुप्त तांत्रिक जानकारी प्राप्त करना और बुद्धि का प्रखर विकास 6।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
महा-शत्रु का मारण और स्तंभन, जीवन से दरिद्रता का नाश, गुप्त तांत्रिक जानकारी प्राप्त करना और बुद्धि का प्रखर विकास 6।
इस मंत्र से क्या होगा?
महा-शत्रु का मारण और स्तंभन, जीवन से दरिद्रता का नाश, गुप्त तांत्रिक जानकारी प्राप्त करना और बुद्धि का प्रखर विकास
जाप विधि
शनिवार या रविवार की रात्रि 7 बजे से मध्यरात्रि 12 बजे के मध्य। काले रंग की धोती धारण कर, पश्चिम दिशा की ओर मुख करके ऊनी आसन पर बैठें। लकड़ी के बाजोट पर काले वस्त्र पर यंत्र स्थापित करें। थाली में काजल से 'धूं' बीज लिखकर यंत्र को लाल सिंदूर की तीन बिंदियों से युक्त करें। सरसों के तेल का दीपक जलाएं। विनियोग और ऋष्यादि न्यास कर 11 दिन (23 माला प्रतिदिन) या 21 दिन (63 माला प्रतिदिन) जप करें। अंत में कमल गट्टा व हविष्य से दशांश हवन कर यंत्र को सुरक्षित रख लें 6।
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beej mantraवं, शं, षं, सं
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