चण्डी (सजीवन) जप मंत्र
ॐ ह्रीं ह्रीं वं वं ऐं ऐं मृतसंजीवनि विधे मृतमुत्थापयोत्थापय क्रीं ह्रीं ह्रीं वं स्वाहा
सुप्त या मृतप्राय मंत्रों में प्राण-प्रतिष्ठा (सजीवन) कर उन्हें फलदायी बनाना। 29
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
सुप्त या मृतप्राय मंत्रों में प्राण-प्रतिष्ठा (सजीवन) कर उन्हें फलदायी बनाना। 29
इस मंत्र से क्या होगा?
सुप्त या मृतप्राय मंत्रों में प्राण-प्रतिष्ठा (सजीवन) कर उन्हें फलदायी बनाना
जाप विधि
२१ बार जप। 29
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
दुं
ugra mantraॐ ह्ल्रीं ह्ल्रीं उग्र तारे क्रीं क्रीं फट्
siddh mantraॐ श्रीं महादेव्यै सरस्वत्यै स्वाहा
dhyan mantraशान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिहृद्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
sabar mantraओम गुरु जी शिव बैठे कैलाश विष्णु बैठे बैकुंठ मेरी भक्ति शिव की शक्ति पूजू अमुक देव मनाऊं तो आवे ना आवे तो दुहाई शिव शंकर की दुहाई माता काली की दुहाई गुरु गोरखनाथ की 1
navgrah mantraॐ इमं देवा असपत्नं सुवध्यं महते क्षत्राय महते ज्यैष्ठ्याय महते जानराज्यायेन्द्रस्येन्द्रियाय। इमममुष्य पुत्रममुष्यै पुत्रमस्यै विश एष वोऽमी राजा सोमोऽस्माकं ब्राह्मणानां राजा।।