माता सरस्वती जप मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्वादिनी सरस्वती देवी मम जिव्हायां सर्वविद्यां देहि दापय स्वाहा
स्मरण शक्ति में अभूतपूर्व वृद्धि, कुशाग्र बुद्धि, कला और वाक्-सिद्धि की प्राप्ति। 49
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
स्मरण शक्ति में अभूतपूर्व वृद्धि, कुशाग्र बुद्धि, कला और वाक्-सिद्धि की प्राप्ति। 49
इस मंत्र से क्या होगा?
स्मरण शक्ति में अभूतपूर्व वृद्धि, कुशाग्र बुद्धि, कला और वाक्-सिद्धि की प्राप्ति
जाप विधि
१०८ बार, स्फटिक की माला, प्रातः काल श्वेत वस्त्र धारण कर। 19
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ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ॐ ॥
mool mantraॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये। वरवर्दा सर्वजन्म में वशमान्यै नमः
kaamya mantraॐ ह्रीं योगिनि योगिनि योगेश्वरि योग भयङ्करि सकल स्थावर जङ्गमस्य मुख हृदयं मम वशं आकर्षय आकर्षय नमः।
kavach mantraॐ भूर्भुव: स्व: प्रांचामा पातु भूतेशः अग्ने पातु शंकर दक्षिणे पातुमा रुद्रो नैऋत्य स्थानु रेवच पश्चिमे खंड परशु वायव्या चंद्रशेखर उत्तरे गिरीशः पातु चैशान्य ईश्वर स्वयं उर्ध्वे मुंड सदा पातु चाध्य मृत्युंजय स्वयं जले स्थले चांदरीक्षे स्वप्ने जागरने सदा पिना कितुमा प्रीत्या भक्तम वैभक्त वत्सल य: सदा धारयेन्मर्त्य: शैवं कवचमुत्तमम् । न तस्य जायते क्वापि भयं शंभोरनुग्रहात् ॥ 30॥ इति अमोघ शिव कवच सम्पूर्ण ॥ 4
sabar mantraझाड़ि झाड़ि कापड़ पिन्दि । वीर मुष्टे बांधि बाल । बुले एलाम मशान भूम होते भैरव। कटार हाते। लोहार बाड़ी। बाम हाते चामदड़ि। आज्ञा दिल राजा चुडं हाते । लोहार किला । मुद्गर धिनि। विगलि घुंडिकार आज्ञे 25
beej mantraह्रीं