देवी चण्डिका काम्य मंत्र
देवि प्रसीद परिपालय नोऽरिभीतेर्नित्यं यथासुरवधादधुनैव सद्यः। पापानि सर्वजगतां प्रशमं नयाशु उत्पातपाकजनितांश्च महोपसर्गान्॥
विश्व के सभी पापों, भयंकर तापों (कष्टों) का निवारण और भयंकर उत्पातों से बचाव 28।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
विश्व के सभी पापों, भयंकर तापों (कष्टों) का निवारण और भयंकर उत्पातों से बचाव 28।
इस मंत्र से क्या होगा?
विश्व के सभी पापों, भयंकर तापों (कष्टों) का निवारण और भयंकर उत्पातों से बचाव
जाप विधि
देवी की प्रतिमा के समक्ष नित्य १ माला जप 28।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
हं, क्षं
kavach mantraशम्भुर्मे मस्तकं पातु मुखं पातु महेश्वरः। दन्तपङ्क्तिं च नीलकण्ठोऽप्यधरोष्ठं हरः स्वयम्। कण्ठं पातु चन्द्रचूडः स्कन्धौ वृषवाहनः। वक्षःस्थलं नीलकण्ठः पातु पृष्ठं दिगम्बरः। स्वप्ने जागरणे चैव स्थाणुर्मे पातु सन्ततम्। 8
navgrah mantraॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥
dhyan mantraबर्हापीडं नटवरवपुः कर्णयोः कर्णिकारं बिभ्रद्वासः कनककपिशं वैजयन्तीं च मालाम्। रन्ध्रान् वेणोरधरसुधया पूरयन् गोपवृन्दैर्वृन्दारण्यं स्वपदरमणं प्राविशद् गीतकीर्तिः॥
jap mantraॐ
mool mantraॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ॐ नमो भगवते स्वर्णाकर्षण भैरवाय हिरण्यं दापय दापय श्रीं ह्रीं क्लीं स्वाहा