देवी चण्डिका काम्य मंत्र
देवि प्रसीद परिपालय नोऽरिभीतेर्नित्यं यथासुरवधादधुनैव सद्यः। पापानि सर्वजगतां प्रशमं नयाशु उत्पातपाकजनितांश्च महोपसर्गान्॥
विश्व के सभी पापों, भयंकर तापों (कष्टों) का निवारण और भयंकर उत्पातों से बचाव 28।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
विश्व के सभी पापों, भयंकर तापों (कष्टों) का निवारण और भयंकर उत्पातों से बचाव 28।
इस मंत्र से क्या होगा?
विश्व के सभी पापों, भयंकर तापों (कष्टों) का निवारण और भयंकर उत्पातों से बचाव
जाप विधि
देवी की प्रतिमा के समक्ष नित्य १ माला जप 28।
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