भगवती नारायणी काम्य मंत्र
विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु। त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् का ते स्तुतिः स्तव्यपरा परोक्तिः॥
समस्त प्रकार की विद्याओं और कलाओं की प्राप्ति तथा समाज की सभी स्त्रियों के प्रति मातृभाव की जागृति 28।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
समस्त प्रकार की विद्याओं और कलाओं की प्राप्ति तथा समाज की सभी स्त्रियों के प्रति मातृभाव की जागृति 28।
इस मंत्र से क्या होगा?
समस्त प्रकार की विद्याओं और कलाओं की प्राप्ति तथा समाज की सभी स्त्रियों के प्रति मातृभाव की जागृति
जाप विधि
विद्या और ज्ञान के अर्जन हेतु देवी के समक्ष नित्य १०८ बार जप 28।
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