श्री कृष्ण (नटवर स्वरूप) ध्यान मंत्र
बर्हापीडं नटवरवपुः कर्णयोः कर्णिकारं बिभ्रद्वासः कनककपिशं वैजयन्तीं च मालाम्। रन्ध्रान् वेणोरधरसुधया पूरयन् गोपवृन्दैर्वृन्दारण्यं स्वपदरमणं प्राविशद् गीतकीर्तिः॥
मन के अवसाद और तनाव को समाप्त कर अंतर्मन में अपार उल्लास, जीवंतता और ईश्वरीय प्रेम का संचार करना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
मन के अवसाद और तनाव को समाप्त कर अंतर्मन में अपार उल्लास, जीवंतता और ईश्वरीय प्रेम का संचार करना।
इस मंत्र से क्या होगा?
मन के अवसाद और तनाव को समाप्त कर अंतर्मन में अपार उल्लास, जीवंतता और ईश्वरीय प्रेम का संचार करना
जाप विधि
ध्यान में श्री कृष्ण को सर्वश्रेष्ठ नर्तक के रूप में मस्तक पर मोरपंख, कानों में कनेर का पुष्प, पीले वस्त्र और वैजयंती माला पहने हुए बाँसुरी बजाते हुए विज़ुअलाइज़ करें।
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