श्री कृष्ण (नटवर स्वरूप) ध्यान मंत्र
बर्हापीडं नटवरवपुः कर्णयोः कर्णिकारं बिभ्रद्वासः कनककपिशं वैजयन्तीं च मालाम्। रन्ध्रान् वेणोरधरसुधया पूरयन् गोपवृन्दैर्वृन्दारण्यं स्वपदरमणं प्राविशद् गीतकीर्तिः॥
मन के अवसाद और तनाव को समाप्त कर अंतर्मन में अपार उल्लास, जीवंतता और ईश्वरीय प्रेम का संचार करना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
मन के अवसाद और तनाव को समाप्त कर अंतर्मन में अपार उल्लास, जीवंतता और ईश्वरीय प्रेम का संचार करना।
इस मंत्र से क्या होगा?
मन के अवसाद और तनाव को समाप्त कर अंतर्मन में अपार उल्लास, जीवंतता और ईश्वरीय प्रेम का संचार करना
जाप विधि
ध्यान में श्री कृष्ण को सर्वश्रेष्ठ नर्तक के रूप में मस्तक पर मोरपंख, कानों में कनेर का पुष्प, पीले वस्त्र और वैजयंती माला पहने हुए बाँसुरी बजाते हुए विज़ुअलाइज़ करें।
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ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः ॥
mool mantraॐ श्रीं बं सौं बलवर्धनाय बालेश्वराय रुद्राय फट् ॐ
jap mantraॐ ऐं महासरस्वत्यै नमः
kaamya mantraज्ञानानन्दमयं देवं निर्मलस्फटिकाकृतिम्। आधारं सर्वविद्यानां हयग्रीवमुपास्महे॥
kavach mantraनासिकां पातु मे लक्ष्मीः कमला पातु लोचनम् ॥ ॐ श्रीं पद्मालयायै स्वाहा वक्षः सदावतु ॥ पातु श्रीर्मम कंकालं बाहुयुग्मं च ते नमः ॥ ओम ह्रीम श्रीम लक्ष्मी नमः चिरकाल तक मेरे पैरों का पालन करें ओम ह्रीम श्रीम नमः पद्माए स्वाहा नितम भाग की रक्षा करें ओम श्रीम महालक्ष्मी स्वाहा मेरे सर्वांग की सदा रक्षा करें ओम ह्रीम श्रीम क्लीम महालक्ष्मी स्वाहा आद्या शक्ति महालक्ष्मी भक्तानुग्रहकारिणी धारके पाठके चैव निश्चला निवसे ध्रुवं तंत्रोक्तम लक्ष्मी कवच संपूर्ण ओम 31
sabar mantraओम नमो भूत प्रेत पिशाच दुष्ट दृष्टि विनाशाय ओम क्लीम स्वाहा 27