ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
श्री हनुमान (स्वर्णिम आभा स्वरूप)

श्री हनुमान (स्वर्णिम आभा स्वरूप) ध्यान मंत्र

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥

असीम मानसिक बल और ज्ञान का आह्वान, अंतर्मन के अज्ञान का शमन, और चित्त में निर्मलता तथा पूर्ण समर्पण लाना।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारध्यान मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

असीम मानसिक बल और ज्ञान का आह्वान, अंतर्मन के अज्ञान का शमन, और चित्त में निर्मलता तथा पूर्ण समर्पण लाना।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

असीम मानसिक बल और ज्ञान का आह्वान, अंतर्मन के अज्ञान का शमन, और चित्त में निर्मलता तथा पूर्ण समर्पण लाना

जाप विधि

ध्यान से पूर्व दोनों हाथ जोड़कर मानसिक रूप से स्वर्ण पर्वत के समान चमकते हुए, अपार बलशाली हनुमान जी का स्मरण करते हुए इस मंत्र का धीमे स्वर में जप करें।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

stotra mantra

कृष्ण गोविन्द हे राम नारायण श्रीपते वासुदेवाजित श्रीनिधे। अच्युतानन्त हे माधवाधोक्षज द्वारकानायक द्रौपदीरक्षक।। 9

kavach mantra

ॐ भूर्भुव: स्व: प्रांचामा पातु भूतेशः अग्ने पातु शंकर दक्षिणे पातुमा रुद्रो नैऋत्य स्थानु रेवच पश्चिमे खंड परशु वायव्या चंद्रशेखर उत्तरे गिरीशः पातु चैशान्य ईश्वर स्वयं उर्ध्वे मुंड सदा पातु चाध्य मृत्युंजय स्वयं जले स्थले चांदरीक्षे स्वप्ने जागरने सदा पिना कितुमा प्रीत्या भक्तम वैभक्त वत्सल य: सदा धारयेन्मर्त्य: शैवं कवचमुत्तमम् । न तस्य जायते क्वापि भयं शंभोरनुग्रहात् ॥ 30॥ इति अमोघ शिव कवच सम्पूर्ण ॥ 4

ugra mantra

ओउम कालभैरवरूपाय त्रिनेत्राय महात्मने। प्रेतासनस्थितायैव खडगडमरूधारिणे।। जटाजूटधारी कराल वदनाय च। नमो नमः सदानंद भक्तवत्सल शम्भवे।। ओउम भं भैरवाय भीषणाय नखदंष्ट्राय विकर्तनाय। ताण्डवेशाय रक्तनेत्राय रक्षकाय शत्रुनाशकाय स्वाहा

siddh mantra

ॐ ह्रौं जूं सः भूर्भुवः स्वः त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् भूर्भुवः स्वरौ जूं सः ह्रौं ॐ ॥

navgrah mantra

पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रहमस्तकम्। रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम्॥

bhakti mantra

रामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये