श्री हनुमान (स्वर्णिम आभा स्वरूप) ध्यान मंत्र
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥
असीम मानसिक बल और ज्ञान का आह्वान, अंतर्मन के अज्ञान का शमन, और चित्त में निर्मलता तथा पूर्ण समर्पण लाना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
असीम मानसिक बल और ज्ञान का आह्वान, अंतर्मन के अज्ञान का शमन, और चित्त में निर्मलता तथा पूर्ण समर्पण लाना।
इस मंत्र से क्या होगा?
असीम मानसिक बल और ज्ञान का आह्वान, अंतर्मन के अज्ञान का शमन, और चित्त में निर्मलता तथा पूर्ण समर्पण लाना
जाप विधि
ध्यान से पूर्व दोनों हाथ जोड़कर मानसिक रूप से स्वर्ण पर्वत के समान चमकते हुए, अपार बलशाली हनुमान जी का स्मरण करते हुए इस मंत्र का धीमे स्वर में जप करें।
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