सूर्य नवग्रह मंत्र
ॐ प्रभाकराय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्।
आलस्य का नाश, कार्यक्षेत्र में नवीन अवसरों की प्राप्ति और जीवन से अंधकारमय परिस्थितियों को दूर कर सकारात्मकता लाने हेतु। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
आलस्य का नाश, कार्यक्षेत्र में नवीन अवसरों की प्राप्ति और जीवन से अंधकारमय परिस्थितियों को दूर कर सकारात्मकता लाने हेतु। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
आलस्य का नाश, कार्यक्षेत्र में नवीन अवसरों की प्राप्ति और जीवन से अंधकारमय परिस्थितियों को दूर कर सकारात्मकता लाने हेतु
जाप विधि
नित्य प्रातः काल सूर्य नमस्कार के आसनों का अभ्यास करने के पश्चात् पूर्व दिशा की ओर मुख करके इक्कीस बार जप। 16
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ॐ नमो काली कंकाली पीती भर भर रक्त प्याली चाम की गठड़ी हाड़ की माला भजो आनंद सुंदरी बाला भरपूर वसन कर ले उठाई काम क्रोध कलिका माई लेके अपनी भेंट कड़ाई अमुक की छाती घात चलाई घाट में मरघट कालिका आई कालिका ने अमुक की कच्ची कलेजी खाई न खाई तो कीनाराम औघड़ की दुहाई 12
kavach mantraऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्। जानुनी सेतुकृत् पातु जङ्घे दशमुखान्तकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः। एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्। पातालभूतलव्योम- चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः। रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति। जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः। वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। 34
ugra mantraओउम कालभैरवरूपाय त्रिनेत्राय महात्मने। प्रेतासनस्थितायैव खडगडमरूधारिणे।। जटाजूटधारी कराल वदनाय च। नमो नमः सदानंद भक्तवत्सल शम्भवे।। ओउम भं भैरवाय भीषणाय नखदंष्ट्राय विकर्तनाय। ताण्डवेशाय रक्तनेत्राय रक्षकाय शत्रुनाशकाय स्वाहा
tantrik mantraॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं
naam mantraश्री
jap mantraॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः