केतु नवग्रह मंत्र
ॐ ह्रीं क्रूं क्रूररूपिणे केतवे ऐं सौः स्वाहा॥
अतीन्द्रिय शक्तियों का विकास, गुप्त तांत्रिक विद्याओं में पूर्णता, पूर्व जन्म के शाप (Karmic curses) व ऋण से त्वरित मुक्ति और केतु की अत्यंत क्रूर ग्रहीय ऊर्जा के शमन हेतु। 8
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अतीन्द्रिय शक्तियों का विकास, गुप्त तांत्रिक विद्याओं में पूर्णता, पूर्व जन्म के शाप (Karmic curses) व ऋण से त्वरित मुक्ति और केतु की अत्यंत क्रूर ग्रहीय ऊर्जा के शमन हेतु। 8
इस मंत्र से क्या होगा?
अतीन्द्रिय शक्तियों का विकास, गुप्त तांत्रिक विद्याओं में पूर्णता, पूर्व जन्म के शाप (Karmic curses) व ऋण से त्वरित मुक्ति और केतु की अत्यंत क्रूर ग्रहीय ऊर्जा के शमन हेतु
जाप विधि
रात्रि काल में भगवान कालभैरव या छिन्नमस्ता देवी की आराधना के साथ अष्टधातु या भोजपत्र पर निर्मित केतु यंत्र के समक्ष रुद्राक्ष माला से जप। 8
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ताः सर्वाःप्रशमं यान्ति व्यासोब्रूते न संशयः ॥ 35
mool mantraॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः
beej mantraभ्रां
jap mantraॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
tantrik mantraऐं क्लीं सौः
shanti mantraॐ आप्यायन्तु ममाङ्गानि वाक्प्राणश्चक्षुः श्रोत्रमथो बलमिन्द्रियाणि च सर्वाणि । सर्वं ब्रह्मोपनिषदं माहं ब्रह्म निराकुर्यां मा मा ब्रह्म निराकरोदनिराकरणमस्त्वनिराकरणं मे अस्तु । तदात्मनि निरते य उपनिषत्सु धर्मास्ते मयि सन्तु ते मयि सन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥