नव ग्रहों के शांति मंत्र
79 मंत्रॐ प्र वः शुक्राय भानवे भरध्वं हव्यं मतिं चाग्नये सुपूतम्। यो दैव्यानि मानुषा जनूंष्यन्तर्विश्वानि विद्मना जिगाति।।
विचारों में पवित्रता, शारीरिक सौंदर्य, और ब्रह्मांडीय ऐश्वर्य के प्रबल आकर्षण हेतु विशिष्ट वैदिक यज्ञों व नित्य कर्म में प्रयोग। 19
ॐ ह्सौः श्रीं आं ग्रहाधिराजाय आदित्याय स्वाहा॥
उच्च प्रशासनिक पदों पर निर्विघ्न सफलता, झूठे राजकीय दंड या मुकदमों से स्थायी बचाव, समाज में वर्चस्व की स्थापना और ग्रहाधिराज सूर्य की विशिष्ट तांत्रिक सिद्धि एव…
ॐ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्टापूर्ते सं सृजेथामयं च। अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन् विश्वे देवा यजमानश्च सीदत।।
कुंडली में बुध के मीन राशि (नीच) में होने, राहु के साथ जड़त्व दोष बनाने पर उत्पन्न वाणी दोष (हकलाना), स्नायु तंत्र (Nervous system) व चर्म रोग, शिक्षा में एकाग्…
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरूवे नमः॥
गुरु महादशा के मारक दुष्प्रभावों को नष्ट करने, आध्यात्मिक उन्नति, परम ज्ञान, दर्शन (Philosophy) की समझ और जीवन में असीमित धन व ऐश्वर्य के संचय हेतु इस तांत्रोक्…
ॐ शनैश्चराय विद्महे छायापुत्राय धीमहि तन्नो मन्दः प्रचोदयात्।
अकाल मृत्यु भय निवारण, अनुशासन, कड़े परिश्रम करने की क्षमता और आध्यात्मिक वैराग्य की वृद्धि हेतु। 16
ॐ अङ्गारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात्।
शारीरिक क्षमता और असीमित ऊर्जा की प्राप्ति, आलस्य का नाश और जीवन के हर क्षेत्र में आने वाले विघ्नों के निवारण हेतु। 16
ॐ ऐं जं गं ग्रहेश्वराय शुक्राय नमः॥
प्रचंड वशीकरण प्रभाव, भौतिक व यौवन शक्ति की तांत्रिक वृद्धि, और सांसारिक सुखों को बलपूर्वक अपनी ओर आकर्षित करने हेतु। 8
ॐ विप्रराजाय विद्महे निशानाथाय धीमहि तन्नः सोमः प्रचोदयात्।
रात्रिकालीन भयों (Nightmares) का नाश, विचारों में शुद्धता और आध्यात्मिक ज्ञान के प्रति रुझान बढ़ाने हेतु। 16
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥
शनि दोष के भयंकर कुप्रभावों से त्वरित मुक्ति, गंभीर मुकदमों में बचाव, राजदंड से मुक्ति और कर्म क्षेत्र या आजीविका में आ रही अज्ञात बाधाओं के शीघ्र शमन हेतु यह त…
प्रियंगुकलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम्। सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम्॥
बुध की पापी ग्रहों से युति के कारण उत्पन्न मतिभ्रम और निर्णय लेने की अक्षमता को नष्ट करने, त्वचा में कांति लाने और व्यक्तित्व में अत्यंत सौम्य गुणों के विकास हे…
ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु। यद्दीदयच्छवस ऋतुप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्।।
गुरु के मकर राशि (नीच) में होने, राहु के साथ गुरु-चांडाल योग बनाने पर उत्पन्न शिक्षा में गंभीर बाधा, विवाह में विलंब, यकृत (Liver), प्लीहा (Spleen) एवं मेद (Fat…
ॐ भगभवाय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि तन्नः शनिः प्रचोदयात्।
मारकेश दशा में प्राणों की रक्षा, गंभीर शल्य चिकित्सा (Surgery) में सफलता और मृत्यु भय के पूर्ण निवारण हेतु। 16
धरणीगर्भ सम्भूतं विद्युत्कांति समप्रभम्। कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणमाम्यहम्॥
क्रूर मंगल को शांत करने, वैवाहिक जीवन की बाधाओं (मांगलिक दोष जनित कलह) को दूर करने, क्रोधावेश पर नियंत्रण और शक्ति व अचल संपत्ति की प्राप्ति हेतु महर्षि व्यास र…
ॐ आङ्गिरसाय विद्महे सुराचार्याय धीमहि तन्नो गुरुः प्रचोदयात्।
सर्वोच्च ज्ञान (ब्रह्मज्ञान), सकारात्मक ऊर्जा और सात्विक विचारों की अत्यंत तीव्र वृद्धि तथा चारित्रिक बल की प्राप्ति हेतु। 16
ॐ सों सोमाय नमः
सामान्य चंद्र दोष की शांति, माता से संबंधों में सुधार, कफ विकार शमन और त्वरित मानसिक शीतलता की प्राप्ति हेतु। 7
ॐ वृषभध्वजाय विद्महे घृणिहस्ताय धीमहि तन्नो गुरुः प्रचोदयात्।
धर्म व न्याय के क्षेत्र में प्रतिष्ठा, न्यायिक विवादों में सत्य की विजय और समाज में आदरणीय स्थान की प्राप्ति हेतु। 16
ॐ वीरध्वजाय विद्महे विघ्नहस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात्।
शल्य चिकित्सा (Surgery) में सफलता, दुर्घटनाओं से बचाव और अदम्य वीरता व शौर्य की वृद्धि हेतु। 16
हिमकुंद मृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्। सर्वशास्त्र प्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम्॥
प्रेम संबंधों में स्थिरता व सफलता, जीवन में सौम्यता, विवाह में आ रहे अकारण विलंब को नष्ट करने और शुक्र जनित चारित्रिक दोषों के परिमार्जन हेतु महर्षि व्यास का यह…
ॐ आप्यायस्व समेतु ते विश्वतः सोम वृष्णियम्। भवा वाजस्य संगथे।।
जीवन में रस, आकर्षण, शारीरिक तरलता (Bodily fluids) को संतुलित करने, गर्भाशय संबंधी रोगों के निवारण और मन में व्याप्त अज्ञात भयों को दूर कर सौम्य शांति की स्थापन…
ॐ भृगुसुताय विद्महे दिव्यदेहाय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्।
दिव्य और निरोगी काया की प्राप्ति, त्वचा के रोगों से मुक्ति और व्यक्तित्व में चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न करने हेतु। 16
ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः॥
शैक्षणिक सफलता, गणित व गूढ़ तर्क शक्ति में तीव्र वृद्धि, शेयर बाजार या वाणिज्यिक कार्यों में लाभ, और जनसंचार (Mass Communication) के क्षेत्र में अपार सफलता हेतु…
ॐ ह्रीं श्रीं ग्रहचक्रवर्तिने शनैश्चराय क्लीं ऐंसः स्वाहा॥
शनि की ग्रहीय चक्रवर्तित्व की ऊर्जा से घोर शत्रुओं, अभिचार कर्मों (काले जादू) और अदृश्य तांत्रिक बाधाओं को समूल नष्ट करने तथा गूढ़ सिद्धियों की प्राप्ति हेतु। 8
ॐ आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च। हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्।।
जन्म कुंडली में सूर्य के नीच राशि (तुला), शत्रु क्षेत्रीय अथवा राहु-केतु के साथ ग्रहण दोष में स्थित होने पर उत्पन्न होने वाली भयंकर राजकीय बाधाओं, कार्यस्थल पर…
ॐ घृणि सूर्याय नमः
सामान्य सूर्य दोष की दैनिक शांति, शारीरिक तेज व स्वास्थ्य में सुधार, सरकारी नौकरी के प्रयासों में आ रही बाधाओं का निवारण और विलंब से हो रहे राजकीय कार्यों की शी…
ॐ आत्रेयाय विद्महे सोमपुत्राय धीमहि तन्नो बुधः प्रचोदयात्।
उच्च विद्या प्राप्ति, तार्किक विश्लेषण क्षमता का विकास और मानसिक उलझनों व बौद्धिक अशांति के पूर्ण निवारण हेतु। 16
देवानांच ऋषीनांच गुरुं कांचन सन्निभम्। बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्॥
उच्च शिक्षा प्राप्ति, इष्ट देव व गुरुजनों की विशेष कृपा, सत्य और धर्म के मार्ग पर अडिग स्थिरता, और जीवन में नैतिकता व सद्गुणों के विकास हेतु महर्षि व्यास का यह…
ॐ कया नश्चित्र आ भुवदूती सदावृध: सखा। कया शचिष्ठया वृता।।
भयंकर कालसर्प दोष, गुरु-चांडाल दोष, या ग्रहण दोष के कारण उत्पन्न अचानक दुर्घटनाओं, गंभीर मानसिक भ्रम (Phobias), अनिद्रा, कुष्ठ व त्वचा संबंधी असाध्य रोगों, झूठे…
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः॥
साहस, पराक्रम और आत्मबल में त्वरित वृद्धि, असाध्य ऋण से शीघ्र मुक्ति, रक्तचाप (Blood pressure) के संतुलन और मंगल की मारक अंतर्दशा में अकाल मृत्यु के भय से प्राण…
ॐ ह्रीं श्रीं ख्रीं ऐं ग्लौं ग्रहाधिपतये बृहस्पतये ब्रीं ठः ऐं ठः श्रीं ठः स्वाहा॥
तंत्र और मंत्र साधनाओं की पूर्ण सिद्धि में गुरु का अभेद्य रक्षण प्राप्त करने, और ब्रह्मांडीय ऐश्वर्य व गुप्त ज्ञान की असीम प्राप्ति हेतु यह आगम मंत्र प्रयुक्त ह…
ॐ श्रीं क्रीं ह्रां चं चन्द्राय नमः॥
तंत्र विद्या में मानसिक स्थिरता प्राप्त करने, तीव्र सम्मोहन शक्ति का विकास करने और चंद्र की सौम्य तांत्रिक ऊर्जा को आकर्षित कर धन एवं ऐश्वर्य की वृद्धि हेतु इस…
जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्। तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥
महर्षि व्यास रचित इस पौराणिक मंत्र का उपयोग जन्मपत्रिका में सूर्य के पापक ग्रहों के साथ होने पर उत्पन्न अंधकार (निराशा) और अज्ञान को दूर करने, पूर्व जन्म के पाप…
ऐं ह्सौः श्रीं द्रां कं ग्रहाधिपतये भौमाय स्वाहा॥
घोर शत्रुओं का पूर्ण दमन, भयंकर युद्ध या उलझे हुए मुकदमों में एकतरफा विजय, और अचल संपत्ति के तांत्रिक अधिग्रहण हेतु इस आगम मंत्र की साधना की जाती है। 8
ॐ अन्नात्परिस्त्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत् क्षत्रं पय: सोमं प्रजापति:। ऋतेन सत्यमिन्द्रियं विपानं शुक्रमन्धस इन्द्रस्येन्द्रियमिदं पयोऽमृतं मधु।।
कुंडली में शुक्र के कन्या राशि (नीच) में होने, सूर्य के साथ पूर्ण अस्त होने पर उत्पन्न भयंकर वैवाहिक कलह, भौतिक सुखों के पूर्ण अभाव, प्रजनन, मूत्र मार्ग व गुर्द…
ॐ इमं देवा असपत्नं सुवध्यं महते क्षत्राय महते ज्यैष्ठ्याय महते जानराज्यायेन्द्रस्येन्द्रियाय। इमममुष्य पुत्रममुष्यै पुत्रमस्यै विश एष वोऽमी राजा सोमोऽस्माकं ब्राह्मणानां राजा।।
कुंडली में केमद्रुम योग, विष योग (शनि-चंद्र युति), या चंद्र के वृश्चिक राशि (नीच) में होने से उत्पन्न भयंकर मानसिक अवसाद, श्वास एवं कफ जनित रोगों से मुक्ति तथा…
ॐ बृं बृहस्पतये नमः (अथवा ॐ ह्रीं क्लीं हूं बृहस्पतये नमः)
गुरु के मारक प्रभाव का दैनिक शमन, पाचन तंत्र के रोगों से बचाव और सामान्य गुरु दोष की त्वरित शांति हेतु। 7
ॐ अं अंगारकाय नमः (अथवा ॐ भौमाय नमः)
दैनिक जीवन में अकारण क्रोध और उग्रता पर नियंत्रण, भाइयों से प्रेम वृद्धि तथा सामान्य मंगल शांति हेतु। 15
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः॥
कला, संगीत, फैशन, मीडिया क्षेत्र में अपार सफलता, असीमित भौतिक समृद्धि, धन संचय और शारीरिक आकर्षण व ओज में तीव्र वृद्धि हेतु यह तांत्रोक्त बीज मंत्र अचूक है। 2
ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृततत्त्वाय धीमहि तन्नश्चन्द्रः प्रचोदयात्।
अमृत तत्व (दीर्घायु और निरोगी काया) की प्राप्ति, जल से संबंधित दुर्घटनाओं से बचाव तथा चंद्र गोचर के प्रतिकूल प्रभावों का शमन हेतु। 16
ॐ शुं शुक्राय नमः
दैनिक जीवन में सामान्य शुक्र शांति, आकर्षण और धन का प्रवाह बनाए रखने हेतु। 1
ॐ लोहिताक्षाय विद्महे भूलाभाय धीमहि तन्नोऽङ्गारकः प्रचोदयात्।
भूमि, भवन और रियल एस्टेट से संबंधित कार्यों में असीम लाभ, तथा रुकी हुई पैतृक संपत्ति की प्राप्ति हेतु। 16
ॐ भार्गवाय विद्महे असुराचार्याय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्।
कलात्मक कौशल का तीव्र विकास, जीवन के सौंदर्य बोध की समझ और सांसारिक व भौतिक बाधाओं का पूर्ण शमन। 16
ॐ आदित्याय सोमाय मङ्गलाय बुधाय च। गुरु शुक्र शनिभ्यश्च राहवे केतवे नमः॥
सभी नौ ग्रहों को एक साथ अनुकूल बनाने, दैनिक गोचर (Transit) के कारण उत्पन्न होने वाली सामान्य बाधाओं को टालने और नवग्रहों की कृपा से दिन-प्रतिदिन के भौतिक तथा आध…
ॐ अश्वध्वजाय विद्महे धनुर्हस्ताय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्।
वीर्य संबंधी विकारों का नाश, गुप्त रोगों से मुक्ति और विपरीत लिंगी आकर्षण में वृद्धि हेतु। 16
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥
सूर्य की मारक महादशा या अंतर्दशा के भयंकर कष्टों का त्वरित शमन करने, प्रबल आत्मबल की प्राप्ति, शासकीय और कानूनी विवादों में विजय प्राप्त करने तथा शारीरिक ऊर्जा…
ॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शं योरभि स्रवन्तु न:।।
शनि की महाकष्टकारी साढ़ेसाती, ढैय्या, मारक महादशा, शनि के मेष राशि (नीच) में होने पर उत्पन्न भयंकर वात रोग, दीर्घकालिक असाध्य बीमारियों, नौकरी या व्यापार में अच…
ॐ निशाकराय विद्महे कलानाथाय धीमहि तन्नः सोमः प्रचोदयात्।
कला, संगीत और साहित्य के क्षेत्र में सफलता, भावनाओं के ज्वार पर नियंत्रण और व्यक्तित्व में आकर्षण वृद्धि हेतु। 16
नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तंड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥
सड़क दुर्घटनाओं से रक्षा, मृत्युतुल्य कष्टों (मारकेश प्रभाव) का नाश, अकारण भय से मुक्ति और क्रूर शनिदेव को प्रसन्न कर उनकी कृपा व संरक्षण प्राप्त करने हेतु यह प…
ॐ ह्रां क्रीं टं ग्रहनाथाय बुधाय स्वाहा॥
तंत्रोक्त विद्याओं में तीव्र धारणा शक्ति (Memory), वाक्-सिद्धि (कही हुई बात का सत्य होना) और व्यापारिक सम्मोहन (ग्राहकों को आकर्षित करने की शक्ति) प्राप्त करने…
ॐ शं शनैश्चराय नमः
दैनिक जीवन में शनि के क्रूर प्रभावों को शांत रखने और कार्यों में आलस्य को दूर करने हेतु। 7
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः॥ (अथवा ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः)
चंद्र की मारक महादशा में आने वाले घोर कष्टों, अनिद्रा, मानसिक तनाव (Depression) और अस्थिरता को दूर कर रचनात्मकता, कलात्मक ज्ञान और सौम्यता में वृद्धि हेतु यह ता…
ॐ काश्यपाय विद्महे सूर्यपुत्राय धीमहि तन्नो मन्दः प्रचोदयात्।
पिता-पुत्र के मध्य के विवादों का शमन, पैतृक संपत्ति की प्राप्ति और अहंकार के नाश हेतु। 16
ॐ बुं बुधाय नम:॥
त्वरित बुध शांति, स्नायविक दुर्बलता का शमन और दैनिक बुद्धि कार्यों व लेखन में तीक्ष्णता हेतु। 15
ॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि तन्नो मन्दः प्रचोदयात्।
गुप्त शत्रुओं का विनाश, लंबी बीमारियों से धीरे-धीरे मुक्ति और न्यायपालिका के मामलों में निर्णय पक्ष में करने हेतु। 16
ॐ शीतप्रभाय विद्महे षोडशकलाय धीमहि तन्नः सोमः प्रचोदयात्।
जीवन के सभी षोडश (सोलह) प्रकार के सुखों की प्राप्ति, उग्रता का शमन और दांपत्य जीवन में मधुरता लाने हेतु। 16
ॐ गजध्वजाय विद्महे शुकहस्ताय धीमहि तन्नो बुधः प्रचोदयात्।
व्यापारिक वृद्धि, वाक् चातुर्य से विरोधियों को शांत करने और हास्य-विनोद व कलात्मक अभिव्यक्ति में निपुणता हेतु। 16
ॐ ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु॥
जन्म पत्रिका में एक से अधिक ग्रहों के नीच, शत्रु क्षेत्रीय या पाप कर्तरी प्रभाव में होने पर सामूहिक रूप से सभी नवग्रहों की शांति हेतु इसका उपयोग किया जाता है। म…
ॐ प्रभाकराय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्।
आलस्य का नाश, कार्यक्षेत्र में नवीन अवसरों की प्राप्ति और जीवन से अंधकारमय परिस्थितियों को दूर कर सकारात्मकता लाने हेतु। 16
दधिशंख तुषाराभं क्षीरोदार्णव सम्भवम्। नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुट भूषणम्॥
महर्षि व्यास रचित यह मंत्र मन की एकाग्रता, मुख के सौंदर्य में वृद्धि, कल्पनाशीलता का विकास तथा चंद्र-राहु युति जनित भ्रम (Phobias) को दूर कर शिव कृपा के माध्यम…
ॐ अग्निमूर्धा दिव: ककुत्पति: पृथिव्या अयम्। अपां रेतां सि जिन्वति।।
कुंडली में मंगल के कर्क राशि (नीच) में होने, भयंकर मांगलिक दोष, रक्त विकार, अग्नि भय, अस्त्र-शस्त्र से चोट के भय, गंभीर ऋण और भूमि या पैतृक संपत्ति के विवादों क…
ॐ सौम्यरूपाय विद्महे बाणेशाय धीमहि तन्नो बुधः प्रचोदयात्।
मित्रों और संबंधियों के साथ विवादों का शमन, कूटनीति में सफलता और सौम्य व आकर्षक व्यक्तित्व के निर्माण हेतु। 16