शुक्र नवग्रह मंत्र
ॐ अन्नात्परिस्त्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत् क्षत्रं पय: सोमं प्रजापति:। ऋतेन सत्यमिन्द्रियं विपानं शुक्रमन्धस इन्द्रस्येन्द्रियमिदं पयोऽमृतं मधु।।
कुंडली में शुक्र के कन्या राशि (नीच) में होने, सूर्य के साथ पूर्ण अस्त होने पर उत्पन्न भयंकर वैवाहिक कलह, भौतिक सुखों के पूर्ण अभाव, प्रजनन, मूत्र मार्ग व गुर्दे (Kidney) संबंधी असाध्य रोगों के निवारण
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
कुंडली में शुक्र के कन्या राशि (नीच) में होने, सूर्य के साथ पूर्ण अस्त होने पर उत्पन्न भयंकर वैवाहिक कलह, भौतिक सुखों के पूर्ण अभाव, प्रजनन, मूत्र मार्ग व गुर्दे (Kidney) संबंधी असाध्य रोगों के निवारण तथा दाम्पत्य सुख व चरम ऐश्वर्य की प्राप्ति हेतु यह वैदिक मंत्र है। 1
इस मंत्र से क्या होगा?
कुंडली में शुक्र के कन्या राशि (नीच) में होने, सूर्य के साथ पूर्ण अस्त होने पर उत्पन्न भयंकर वैवाहिक कलह, भौतिक सुखों के पूर्ण अभाव, प्रजनन, मूत्र मार्ग व गुर्दे (Kidney) संबंधी असाध्य रोगों के निवारण तथा दाम्पत्य सुख व चरम ऐश्वर्य की प्राप्ति हेतु यह वैदिक मंत्र है
जाप विधि
शुक्रवार को शुक्र की होरा अथवा भरणी, पूर्वाफाल्गुनी या पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) दिशा की ओर मुख करके अनुष्ठान प्रारंभ करें। श्वेत रेशमी आसन पर बैठकर स्फटिक या सफेद चंदन की माला से चालीस दिनों के भीतर सोलह हजार मंत्रों का जप करना अनिवार्य है। गूलर की समिधा, घृत और शर्करा से दशांश हवन करें। 1
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ब्रीं
ugra mantraॐ नमो भगवते उग्र भैरवाय सर्वविघ्ननाशाय ठः ठः स्वाहा
siddh mantraॐ प्रं प्राप्त्यै नमः स्वाहा ।
dhyan mantraमनोबुद्ध्यहङ्कारचित्तानि नाहं न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे। न च व्योम भूमिर्न तेजो न वायुश्चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥
sabar mantraमाई नथिया पांचो बावरी पीर गोगा जहार वर तेरे साथ चले चलो इस्माइल जोगी चलो मेरे शब्द पर चलो सत्य पर धर्म पर चलो ना चलो तो आदि शक्ति कामाख्या की आन माता सहजा योगिन की आन शिवशंकर की आन शब्द साचा पेंड काचा देखो इस्माल जोगी तेरे शब्द का तमाशा सत्य का नाम आदेश आदेश आदेश 14
bhakti mantraश्री राम जय राम जय जय राम