उग्र भैरव उग्र मंत्र
ॐ नमो भगवते उग्र भैरवाय सर्वविघ्ननाशाय ठः ठः स्वाहा
सर्वविघ्ननाश, सांसारिक पाश से मुक्ति, घोर दुःख, रोग-विकार व प्रबल शत्रुओं का समूल नाश 12।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सर्वविघ्ननाश, सांसारिक पाश से मुक्ति, घोर दुःख, रोग-विकार व प्रबल शत्रुओं का समूल नाश 12।
इस मंत्र से क्या होगा?
सर्वविघ्ननाश, सांसारिक पाश से मुक्ति, घोर दुःख, रोग-विकार व प्रबल शत्रुओं का समूल नाश
जाप विधि
उग्र भैरव अत्यंत भयंकर और संहारकारी स्वरूप हैं। तांत्रिक षट्कर्म की सिद्धि के लिए सद्गुरु के निर्देशानुसार कामना विशेष का संकल्प लेकर एकांत में रुद्राक्ष माला से जप किया जाता है 12।
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ॐ सूर्याचन्द्रमसौ धाता यथा पूर्वमकल्पयत् । दिवं च पृथिवीं च अन्तरिक्षमथो स्वः ॥
kavach mantraऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्। जानुनी सेतुकृत् पातु जङ्घे दशमुखान्तकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः। एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्। पातालभूतलव्योम- चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः। रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति। जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः। वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। 34
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