ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
त्रिपुर भैरवी महाविद्या

त्रिपुर भैरवी महाविद्या सिद्ध मंत्र

ॐ ह्रीं भैरवी कलौं ह्रीं स्वाहा ॥

अज्ञानता के अंधकार और भय का संपूर्ण विनाश 34। यह मंत्र साधक के भीतर योद्धा के समान ऊर्जा (Warrior energy) भरता है 33। कुण्डलिनी शक्ति का जागरण, नकारात्मक ऊर्जा से पूर्ण सुरक्षा, और जीवन की समस्त जटिल

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारसिद्ध मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

अज्ञानता के अंधकार और भय का संपूर्ण विनाश 34। यह मंत्र साधक के भीतर योद्धा के समान ऊर्जा (Warrior energy) भरता है 33। कुण्डलिनी शक्ति का जागरण, नकारात्मक ऊर्जा से पूर्ण सुरक्षा, और जीवन की समस्त जटिल बाधाओं को काटकर सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है 33।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

अज्ञानता के अंधकार और भय का संपूर्ण विनाश 34

02

यह मंत्र साधक के भीतर योद्धा के समान ऊर्जा (Warrior energy) भरता है 33

03

कुण्डलिनी शक्ति का जागरण, नकारात्मक ऊर्जा से पूर्ण सुरक्षा, और जीवन की समस्त जटिल बाधाओं को काटकर सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है

जाप विधि

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पूर्व) या गोधूलि वेला में इस मंत्र का १०८ बार जप किया जाता है 33। लाल वस्त्र, लाल आसन और लाल पुष्पों का उपयोग श्रेष्ठ है 34। देवी को १०,००० उगते सूर्यों के समान तेजस्विनी, खड्ग धारण किए हुए, और अभय एवं वरद मुद्रा में ध्यान किया जाता है 34।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

gyan mantra

सरस्वती महाभागे विद्ये कमललोचने । विश्वरूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोऽस्तु ते ॥

naam mantra

पवन

stotra mantra

शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्दसूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय। श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै शि काराय नमः शिवाय्॥ 19

sabar mantra

ॐ नमो आदेश गुरु का आदेश काली काली महाकाली इन्द्र की बेटी ब्रम्हा की साली चाम की गठरी हाड़ की माला भजो आनन्द सुंदरी बाला। भरपूर वसन करले उठाई काम क्रन्ति कलिका आई लुच्ची मोहन भोग भेट कड़ाही जहा भेजा वहा जाई कष्ट दुखो से लेव बचाई सभी देत्यन को मार भगाई आदि अंत तू रही सहाई में पूत तू मेरी माई सब दुखन से लेव बचाई गुरु की शक्ति हमारी भक्ति फुरे मंत्र दोहाई काली की ईश्वरो वाचा 12

tantrik mantra

ॐ क्षं पक्ष ज्वाल जिव्हे कराल दंष्ट्रे प्रत्यंगिरे क्षं ह्रीं हुं फट्

vaidik mantra

ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः । स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥