उच्छिष्ट गणपति (द्वादशाक्षरी) सिद्ध मंत्र
ॐ ह्रीं गं हस्ति-पिशाचि-लिखे स्वाहा ।
गंभीर आर्थिक संकटों, पुराने कर्जों और वित्तीय अस्थिरता का शमन। यह मंत्र कुण्डलिनी शक्ति को सक्रिय कर साधक के जीवन में भारी भौतिक संपन्नता और आध्यात्मिक पूर्णता का संचार करता है।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
गंभीर आर्थिक संकटों, पुराने कर्जों और वित्तीय अस्थिरता का शमन। यह मंत्र कुण्डलिनी शक्ति को सक्रिय कर साधक के जीवन में भारी भौतिक संपन्नता और आध्यात्मिक पूर्णता का संचार करता है।
इस मंत्र से क्या होगा?
गंभीर आर्थिक संकटों, पुराने कर्जों और वित्तीय अस्थिरता का शमन
यह मंत्र कुण्डलिनी शक्ति को सक्रिय कर साधक के जीवन में भारी भौतिक संपन्नता और आध्यात्मिक पूर्णता का संचार करता है
जाप विधि
माया बीज (ह्रीं) और गणपति बीज (गं) से युक्त यह मंत्र अत्यंत शक्तिशाली है 53। इसे पूर्ण एकाग्रता और पवित्रता के साथ गुरु द्वारा निर्देशित संख्या में जपा जाता है 53।
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ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्
sabar mantraओम चौकी हनुमत वीर की बाण ध्वजा फहराए मारू मारू मारुत सुत मुष्टिक शत्रु नसाय मेरे इष्ट रामचंद्र जी अगुवा हनुमंता वीर चौकी सुदर्शन चक्र की रक्षा करें शरीर टोना ब्रह्म भूत प्रेत संग डाईन डाकिनी सांप बिच्छू चोर बट सब कुछ निष्फल जाई 6
stotra mantraअविकाराय शुद्धाय नित्याय परमात्मने । सदैकरूपरूपाय विष्णवे सर्वजिष्णवे ॥ 10
gyan mantraॐ श्री हयग्रीवाय नमः ॥
naam mantraकुमार
beej mantraत्व्म्श्रीः