ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
उच्छिष्ट गणपति (द्वादशाक्षरी)

उच्छिष्ट गणपति (द्वादशाक्षरी) सिद्ध मंत्र

ॐ ह्रीं गं हस्ति-पिशाचि-लिखे स्वाहा ।

गंभीर आर्थिक संकटों, पुराने कर्जों और वित्तीय अस्थिरता का शमन। यह मंत्र कुण्डलिनी शक्ति को सक्रिय कर साधक के जीवन में भारी भौतिक संपन्नता और आध्यात्मिक पूर्णता का संचार करता है।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारसिद्ध मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

गंभीर आर्थिक संकटों, पुराने कर्जों और वित्तीय अस्थिरता का शमन। यह मंत्र कुण्डलिनी शक्ति को सक्रिय कर साधक के जीवन में भारी भौतिक संपन्नता और आध्यात्मिक पूर्णता का संचार करता है।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

गंभीर आर्थिक संकटों, पुराने कर्जों और वित्तीय अस्थिरता का शमन

02

यह मंत्र कुण्डलिनी शक्ति को सक्रिय कर साधक के जीवन में भारी भौतिक संपन्नता और आध्यात्मिक पूर्णता का संचार करता है

जाप विधि

माया बीज (ह्रीं) और गणपति बीज (गं) से युक्त यह मंत्र अत्यंत शक्तिशाली है 53। इसे पूर्ण एकाग्रता और पवित्रता के साथ गुरु द्वारा निर्देशित संख्या में जपा जाता है 53।

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