ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
उच्छिष्ट गणपति (नवार्ण)

उच्छिष्ट गणपति (नवार्ण) सिद्ध मंत्र

हस्ति-पिशाचि-लिखे स्वाहा ।

संचित कर्मों (Sanchita Karmas) का पूर्ण विनाश 51। यह 'क्षिप्र सिद्धि दायक' (Quick bestower of accomplishments) है 51। साधक का अहंकार शून्य हो जाता है और उसे अपार आध्यात्मिक संपदा, ज्ञान और कुबेर के सम

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारसिद्ध मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

संचित कर्मों (Sanchita Karmas) का पूर्ण विनाश 51। यह 'क्षिप्र सिद्धि दायक' (Quick bestower of accomplishments) है 51। साधक का अहंकार शून्य हो जाता है और उसे अपार आध्यात्मिक संपदा, ज्ञान और कुबेर के समान भौतिक ऐश्वर्य प्राप्त होता है 51।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

संचित कर्मों (Sanchita Karmas) का पूर्ण विनाश 51

02

यह 'क्षिप्र सिद्धि दायक' (Quick bestower of accomplishments) है 51

03

साधक का अहंकार शून्य हो जाता है और उसे अपार आध्यात्मिक संपदा, ज्ञान और कुबेर के समान भौतिक ऐश्वर्य प्राप्त होता है

जाप विधि

यह तंत्र शास्त्र का अति-गोपनीय साधन है 51। इसे गुरु दीक्षा के उपरांत विशिष्ट न्यासों के साथ जपा जाता है 52। साधक को किसी विशिष्ट भौतिक इच्छा का संकल्प लेने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि ऊर्जा स्वतः आवश्यकता पूर्ति करती है 51।

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